संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। फास्ट ट्रैक कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश लोकेश गुप्ता ने पॉक्सो एक्ट के मामले में प्रमुख गवाहों के मुकरने के कारण तीन आरोपियों को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपियों को अधिक समय तक हिरासत में रखना न्यायसंगत नहीं होगा।
आरोपियों की न्यायिक हिरासत 30 अप्रैल 2025 से चली आ रही थी। मामले में थाना सेक्टर-6 धारूहेड़ा में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि अप्रैल 2025 को उनकी 15 वर्षीय बेटी बिना बताए घर से चली गई थी।
तलाश के बाद उसका कोई पता नहीं चला तो थाने में शिकायत की। जांच के दौरान साइबर सेल की मदद ली गई और गुमशुदगी का विज्ञापन जारी किया गया। पुलिस ने नाबालिग को बरामद कर लिया था।
पीड़िता के बयान के आधार पर पॉक्सो एक्ट की धारा जोड़ी गई। जांच के दौरान 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से कथित तौर पर वाहन और मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस ने मेडिकल जांच कराकर साक्ष्य एकत्र किए और बाद में चालान अदालत में पेश किया गया।
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता और उसकी मां का बयान अदालत में दर्ज हो चुका है। दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आरोपियों ने उनके साथ कोई गलत कृत्य नहीं किया। पीड़िता की आयु को लेकर विवाद है और प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार घटना के समय वह बालिग थी। डीएनए रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है, जिसका मूल्यांकन ट्रायल के दौरान किया जाएगा।
वहीं, राज्य की ओर से लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मुख्य आरोपी के खिलाफ पूर्व में भी दो अन्य मामले दर्ज हैं और अपराध की प्रकृति गंभीर है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों को जमानत दे दी।