रेवाड़ी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमआईसी) आशीष कुमार मंडल की अदालत ने वर्ष 2018 में मारपीट और धमकी देने के मामले में गांव कुतुबपुर निवासी नितिन, संगीता और शिव कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसी मामले में आरोपी सुभाष चंद के खिलाफ कार्रवाई 12 मई 2025 को ही समाप्त कर दी गई थी।
अभियोजन के अनुसार 23 अगस्त 2018 को शिकायतकर्ता राज कुमार अपने चाचा दयानंद के घर जा रहे थे। आरोप था कि इसी दौरान संगीता ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद नितिन और सुभाष चंद लोहे की रॉड लेकर आए। नितिन ने शिकायतकर्ता के सिर पर वार किया।
संगीता ने हाथ और कोहनी पर चोट पहुंचाई और प्लास्टिक पाइप से भी मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचे दयानंद और अन्य लोगों के साथ भी मारपीट करने का आरोप लगाया गया। शिकायत के आधार पर रामपुरा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पूरी होने पर अदालत में चालान पेश किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए, लेकिन एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह अदालत में अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गया। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान घटनाक्रम और अस्पताल पहुंचने के समय से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। इसके अलावा, अभियोजन ने घटना के अन्य महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शियों को गवाही के लिए पेश नहीं किया, जिससे उसके मामले पर संदेह पैदा हुआ।
आरोपियों की मेडिकल रिपोर्ट अदालत में पेश की गई
बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि वास्तविक हमला शिकायतकर्ता पक्ष ने किया था और आरोपियों के घर में घुसकर मारपीट की थी। आरोपियों की मेडिकल रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई। सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। ऐसे में संदेह का लाभ देते हुए नितिन, संगीता और शिव कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 325 और 506 सहपठित धारा 34 के तहत लगे सभी आरोपों से बरी कर दिया।