संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। 1857 की पहली स्वतंत्रता क्रांति में बलिदान देने वाले गांव नसीबपुर के शहीदों की स्मृति में घोषित भव्य शहीद स्मारक का कार्य लंबित है। राष्ट्रीय शहीद परिवार कल्याण फाउंडेशन के संयोजक मेजर डॉ. टीसी राव ने सरकार से शहीद स्मारक का निर्माण जल्द करने की मांग की है।
मेजर डॉ. राव ने कहा कि जब सरकार गुरुग्राम में रेजांगला युद्ध स्मारक बना सकती है तो नसीबपुर में शहीदों का स्मारक क्यों नहीं बनवा सकती। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकारी खर्च पर रेजांगला युद्ध स्मारक का निर्माण करवाया था तो नसीबपुर के लिए भी सरकार को अपनी प्रतिबद्धता निभानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्वयं वर्ष 2016 में नसीबपुर में इस स्मारक की आधारशिला रखी थी, जिसमें 1857 के संग्राम में शहीद हुए 5000 से अधिक वीरों को श्रद्धांजलि देने की योजना थी। तब सरकार ने नसीबपुर और अंबाला कैंट में दो शहीद स्मारकों के निर्माण की घोषणा की थी। अब सरकार का यह कहना कि राज्य में एक जैसे दो स्मारक नहीं बनाए जा सकते, न केवल ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी है, बल्कि शहीदों के सम्मान का सीधा अपमान है। नसीबपुर, नारनौल के निकट स्थित एक ऐतिहासिक गांव, स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है।
वर्ष 1857 में राजा राव तुलाराम और राजा कृष्ण गोपाल के नेतृत्व में अहीरवाल के वीरों ने इस भूमि पर अंग्रेजों के खिलाफ भीषण युद्ध लड़ा था। अंग्रेजों ने स्वयं इस युद्ध को सबसे कठिन संघर्षों में से एक माना था। इतिहासकार बताते हैं कि इस युद्ध में इतना रक्त बहा कि नसीबपुर की धरती लाल हो गई थी। इस गौरवगाथा को स्मरण करते हुए वर्ष 1957 में स्वतंत्रता संग्राम की शताब्दी पर संयुक्त पंजाब सरकार ने नसीबपुर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया था।