रेवाड़ी। देश या जिले की आबादी ह्यूमन रिसोर्स के तौर पर किसी भी देश के लिए उपयोगी हो सकती है। लेकिन लगातार अनियंत्रित होती जनसंख्या परेशानी का सबब भी बन जाती है। इस इन परेशानियों से अवगत कराने के लिए ही विश्व भर में 11 जुलाई को विश्व जन संख्या दिवस के रूप में मनाया जाता है।
जिले की बात करें तो 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी 9 लाख के करीब थी। उस समय 0-6 साल के बच्चों की आबादी करीब एक लाख थी। उसमें लड़कों की संख्या ज्यादा रहती थी। लेकिन बीते 10 सालों के दौरान बेटियों की बुलंदी के चलते बेटा जरूरी की मानसिकता कमजोर हुई है। इसी का परिणाम है कि बेटे के चक्कर में कई बच्चे पैदा करने वालों की संख्या भी कम हुई है। अब समाज में एक या फिर दो बेटियों के बाद ही परिवार नियोजन अपनाने वालों के अनेक उदाहरण हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिला में एक साल में करीब 16-17 हजार बच्चों का जन्म होता है। इनमें बेटियों की संख्या में बहुत ज्यादा अंतर नहीं रह गया है। अब जिले का लिंगानुपात 900 के पार जा चुका है, जबकि 2011 में यह महज 898 ही था।
बढ़ती आबादी के प्रति जागरूकता जरूरी
सीमएओ डॉ. केके के अनुसार यूनाइटेड नेशन ने 11 जुलाई 1989 को आम सभा में विश्व जन संख्या दिवस मनाने का फैसला लिया था। दरअसल 11 जुलाई 1987 तक विश्व जनसंख्या का आंकड़ा 5 अरब के भी पार पहुंच चुका था। तब दुनिया भर के लोगों को बढ़ती आबादी के प्रति जागरूक करने के लिए इसे वैश्विक स्तर पर मनाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि इस दिन पूरी दुनिया में बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए तरह-तरह से लोगों को जागरूक किया जाता है। परिवार नियोजन के मुद्दे पर लोगों से बातचीत की जाती है। इस दिन जगह-जगह जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों के जरिये लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जाती है। इसमें लिंग समानता, मां और बच्चे के स्वास्थ्य, बेटियों की शिक्षा, गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल से लेकर यौन जैसे सभी गंभीर विषयों पर चर्चा की जाती है।
2011 जनगणना के अनुसार...
कुल जन संख्या- 900,332
पुरुष-474,335
महिला- 425,997
जन संख्या वृद्धि दर-17.64%
क्षेत्रफल- 1,594
घनत्व प्रति किमी- 565
लिंगानुपात: 898
औसत साक्षरता:
पुरुष साक्षरता: 91.44
महिला साक्षरता: 69.57
0-6 उम्र के कुल बच्चे-113,893
मेल- 63,743
फीमेल- 50,150
सीएमओ, रेवाड़ी डॉ. केके ने बताया कि समय के साथ लोगों की सोच में बदलाव आया है। बेटियों ने प्रत्येक क्षेत्र में कामयाबी हासिल की है, इससे माता-पिता की सोच भी बदल गई है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो एक या दो बेटियों के साथ ही परिवार नियोजन अपना रहे हैं। इसके चलते लिंगानुपात भी बढ़ा है।