जिला सचिवालय के सभागार में वीरवार को तीन घंटे हुई जिला परिषद की बैठक में जिला प्रमुख मंजूबाला को ग्रांट वितरण के अधिकार को लेकर काफी हंगामा हुआ। नौबत वोटिंग तक आ गई। जिसमें 21 में से 11 पार्षदों ने जिला प्रमुख के खिलाफ वोटिंग की। वहीं पार्षद सुमन पांडे के पक्ष में अधिक वोटिंग होने पर ग्रांट वितरण का अधिकार जिला प्रमुख मंजूबाला के स्थान पर पार्षद सुमन पांडे को दे दिया गया। इसके विरोध में जिला प्रमुख समेत 10 पार्षदों ने सदन का वाक आउट कर दिया। साथ ही जिला प्रमुख ने इसे राजनीतिक द्वेष भावना से प्रेरित बताते हुए विपक्षी पार्षदों पर नाजायज दबाव बनाने का आरोप लगाया।
जिला सचिवालय सभागार में वीरवार को जिला प्रमुख मंजूबाला की अध्यक्षता में जिला परिषद की बैठक हुई। बैठक शुरू होते ही विपक्षी सदस्य 15 फरवरी को हुई बैठक में करीब साढे़ 29 लाख रुपये के विकास कार्यों की सूची को सदन में रखने की मांग करने लगे। इसको लेकर काफी नोकझोंक हुई। बाद में सूची रखी गई। जिसमें करीब साढे़ तीन करोड़ रुपये के विकास कार्यों शामिल किए गए। इसका विपक्षी पार्षदों ने जमकर विरोध किया। उनका कहना था कि पिछली बैठक में साढे़ 29 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सूची दी गई थी। ऐसे में बाद में जिला परिषद को मिले तीन करोड़ रुपये का जिक्र क्यों किया जा रहा है। इस बात को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ।
15 फरवरी की बैठक में 29 लाख 89 हजार 290 रुपये की ग्रांट वितरण के लिए जिला प्रमुख को सर्वसम्मति से अधिकार दिया गया था, लेकिन वीरवार की बैठक में सदस्यों द्वारा इस राशि में कराए गए विकास कार्यों की सूची पर सहमति की बात आई तो जिला प्रमुख ने करीब साढे़ तीन करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए सूची सदन के पटल पर रखी। जबकि विपक्षी सदस्य 15 फरवरी की बैठक में रखे गए विकास कार्यों की सूची रखने की मांग कर रहे थे। इसी बात को लेकर विपक्षी सदस्यों ने जिला प्रमुख से ग्रांट वितरण का अधिकार वापस लेने पर अड़ गए।
ग्रांट वितरण के अधिकारी को लेकर विपक्षी सदस्यों की मांग की लंबी बहस के बाद एक सादे पन्ने पर हस्ताक्षर कराकर वोटिंग कराई गई। इस दौरान कुल 21 सदस्यों में से 11 सदस्यों ने जिला प्रमुख से ग्रांट वितरण का अधिकार वापस लेने के साथ ही पार्षद सुमन पांडे को अधिकार देेने के पक्ष में वोट किया। इन सदस्यों में बावल, जाटूसाना व खोल ब्लॉक समिति अध्यक्ष शामिल थे।
15 फरवरी की बैठक के बाद जिला परिषद को करीब साढे़ तीन करोड़ रुपये की ग्रांट प्राप्त हुई थी। आज की बैठक में इस ग्रांट को वितरण के लिए अधिकार दिए जाने को चर्चा की जा रही थी। इसी दौरान उपजिला प्रमुख जगफूल यादव ने ग्रांट वितरण का अधिकार पार्षद सुमन पांडे को दिए जाने का प्रस्ताव रखा। जिस पर काफी बहस हुई। इस बीच जिला प्रमुख मंजूबाला ने सदन से वॉक आउट कर दिया। उनके साथ ही दस अन्य सदस्यों ने भी वॉक आउट कर दिया। इन सदस्यों में रोहन यादव, हरिश झाबुआ, अमित यादव, नीतू चौधरी, धर्मेंद्र खटाना, शारदा देवी, नाहड़ ब्लॉक समिति अध्यक्ष सुमन आदि शामिल थे।
वाकआउट के बाद उपजिला प्रमुख ने संभाली बैठक की कार्यवाही
जिला प्रमुख व अन्य सदस्यों के सदन से वाकआउट करने के बाद उपजिला प्रमुख ने बैठक की कार्यवाही को चलाया। बैठक में ग्रांट वितरण का अधिकारी पार्षद सुमन पांडे को दिया गया। जिसमें बावल ब्लॉक समिति चेयरमैन बिरेंद्र छिल्लर, जाटूसाना ब्लॉक समिति चेयरपर्सन रूबी यादव, खोल ब्लॉक समिति चेयरपर्सन अर्चना, पार्षद अनिल यादव, अजय पटौदा, आजाद नांधा, मुकेश जाहिदपुर मौजूद रहे।
पिछले समय के दौरान जिन पार्षदों को विकास कार्यों के लिए कम ग्रांट मिली थी। उनके वार्डों में विकास कार्यों के लिए राशि का वितरण किया गया था, जिनका विपक्षी पार्षदों द्वारा राजनैतिक द्वेष भवना से प्रेरित होकर विरोध अनावश्यक विरोध किया जा रहा है। सदन को चलने नहीं दे रहे हैं इसलिए वॉक आउट किया है।
- मंजूबाला, जिला प्रमुख, जिला परिषद