गर्भ में ही भ्रूण हत्या के घिनौने कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक साल के दौरान तीन स्थानों पर छापा मारकर गर्भ गिराने वाली दवा( एमटीपी किट) बेचने वालों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस को स्वास्थ्य विभाग की ओर से सप्लायर के नाम भी बताए गए लेकिन आज तक पुलिस अवैध रुप से इस दवा को उपलब्ध कराने वाले बड़े लोगों तक पहुंच पाने में नाकाम रही है। मोटे लालच आकर इसमें शामिल बेरोजगार व छात्रों पर कार्रवाई कर पुलिस पीठ थपाथपा रही है लेकिन सवाल है कि कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ पाती है। सोमवार को देर शाम हुई कार्रवाई में दो छात्र पकड़े हैं उनकी ओर से दवाई की सप्लाई नारनौल से मिलने की बात कही गई है। बता दें कि सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में एक युवक को डिकॉय के माध्यम से एमटीपी किट 6 हजार रुपये में बेचते हुए गिरफ्तार किया था। वहीं मंगलवार को उसके दूसरे साथी को भी काबू करने की बात सामने आ रही है। सोमवार को गिरफ्तार किए गए युवक से सात एमटीपी किट भी बरामद की गई थी।
बी फार्मेसी के छात्र है पकड़े गए दोनों युवक
एमटीपी किट सप्लाई करने के आरोप शहर के नेहरू पार्क से पकड़ा गए नीतिन ने मनीष द्वारा किट उपलब्ध कराने की बात कही थी। मंगलवार को मनीष को भी काबू करने की बात कही जा रही है। जानकारी के अनुसार दोनों ही बी फार्मा के छात्र हैं और मोटे लालच के चक्कर में इस कारोबार में फंस गए। बताया गया है कि दोनों ने नारनौल निवासी एक युवक द्वारा किट उपलब्ध कराने की बात कही है।
पकड़े न जाएं इसलिए की जा रही होम डिलीवरी
स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के चलते मेडिकल स्टोर पर अब एमटीपी किट अवैध रुप से पहले के मुुकाबले कम बिक रही हैं। अवैध कारोबार मेें जुड़े गिरोह की ओर से गर्भ गिराने वाली दवा की होम डिलीवरी कराई जा रही है, सोमवार को कार्रवाई में यह सामने भी आ चुका है। युवक शहर के नेहरू पार्क में किट की सप्लाई देने पहुंचा था लेकिन पहले से मौजूद टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
सवाल : दो माह बीते सप्लायर को क्यों नहीं पकड़ पाई पुलिस
करीब दो माह पहले स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक मेडिकल स्टोर पर छापा मारकर केमिस्ट को किट बेचते हुए गिरफ्तार किया था। बतौर स्वास्थ्य विभाग उस समय केमिस्ट ने अवैध रुप से सप्लाई करने वाले सप्लायर का नाम बताया था। स्वास्थ्य विभाग ने उस नाम को पुलिस की जांच में शामिल करने के लिए लिखा था लेकिन आज तक उस व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यदि आरोपी को पकड़ा जाता तो अवैध कारोबारियों तक पहुंचा जा सकता था।
अंतिम कड़ी तक क्यों नहीं पहुंच पाते जिम्मेदार, ड्रग्स कंट्रोलर से बातचीत
प्रश्न- किट मार्केट में ने बिके, आपकी जिम्मेदारी है क्यों नहीं अंकुुश लग रहा?
उत्तर- बीते एक साल में तीन जगह कार्रवाई कर रंगे हाथ लोगों को पकड़ा है, कार्रवाई के बाद का काम पुलिस का होता है, पुलिस को डिस्क्लोजर बताए गए हैं लेकिन कुछ नहीं हो पाया। यदि जांच आगे बढ़ती को चेन की आखिरी कड़ी तक पहुंचा जा सकता था।
प्रश्न- मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई
उत्तर- धारुहेड़ा में केमिस्ट का पार्शियली लाइसेंस रद्द कर दिया था। वहीं सोमवार कोई कार्रवाई में भी एक लाइसेंस रद्द किया गया है। इसके अलावा दो से पांच साल तक की सजा का भी प्रावधान है।
प्रश्न- बिना बिल केमिस्ट व युवाओं तक कैसे पहुंच रही है दवाएं
उत्तर- बिना बिल किट खरीदना व बेचना कानूनी अपराध है। जानकारी से पता चला है कि दिल्ली के सेल्समैन के माध्यम से इस तरह की सप्लाई की जा रही है। विभाग की ओर से औचक निरीक्षण कर भी स्टॉक की जांच की जाती है।
इस तरह के कारोबार में जुड़े लोगों से सख्ती से निपटेगा स्वास्थ्य विभाग: नोडल अधिकारी
पीसी-पीएनडीटी के जिला नोडल अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि डीसी यशेंद्र सिंह व सिविल सर्जन डॉ. सुशील माही के निर्देश पर इस तरह के कारोबार में जुड़े लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। जानकारी मिली थी कि कुछ लोग होम डिलीवरी से किट उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बाद टीम गठित कर कार्रवाई की गई है।