संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। दक्षिणी हरियाणा की प्रमुख सांस्कृतिक संस्था बंजारा की ओर से माॅडल टाउन स्थित बाल भवन में नाटककार हबीब तनवीर की लिखित नाटक चरणदास चोर का मंचन किया गया। यह नाटक अपने मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहने का संदेश दे गया।
नाटक का निर्देशन युवा रंगकर्मी विक्रांत सैनी ने वरिष्ठ रंगकर्मी विजय के मार्गदर्शन में किया। संस्था के महासचिव गोपाल वाशिष्ठ ने बताया कि रेवाड़ी में 1988 में शुरू हुई बंजारा संस्था 37 वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में अभिनय कला के विभिन्न रंग बिखेर रही है।
प्रेस सचिव योगेश कौशिक के बताया है कि नाटक में कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को किया भाव विभोर कर दिया। नाटक नायक चरणदास चोर के जीवन के इर्द-गिर्द घूमता है, जो चोरी जैसे पेशे में होने के बावजूद अपने मूल्य और सिद्धांतों पर अडिग रहता है।
चरणदास व्यंग्य में कहता है गुरुजी, मैं तो अंधेरे में चोरी करता हूं लेकिन आप तो दिनदहाड़े लोगों के बीच चोरी करते हो। यह संवाद समाज की कुरीतियों और दोहरे मापदंडों पर तीखा कटाक्ष करता है। एक दिन चोरी करते हुए पुलिस से बचने के लिए वह एक गुरु के आश्रम में पहुंचता है।
वहां गुरु उसे चोरी छोड़ने की सलाह देते हैं, लेकिन चरणदास से गुरुजी गुरु दक्षिणा के रूप में चार वचन लेते हैं। वह कभी झूठ नहीं बोलेगा। वह कभी सोने की थाली में भोजन नहीं करेगा। वह रानी के विवाह प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा। वह कभी राजगद्दी पर नहीं बैठेगा।
उसको लगता है कि वह चोर है कि उसके जीवन में ये परिस्थितियां कभी आएंगी ही नहीं, इसलिए वह आश्वस्त होकर आश्रम से निकल पड़ता है। लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर होता है।
घटनाएं ऐसे मोड़ लेती हैं जहां चरणदास को अपने वादों और प्रलोभनों के बीच संघर्ष करना पड़ता है। रानी स्वयं विवाह का प्रस्ताव देती है, उसे सोने की थाली में भोजन कराया जाता है, और यहां तक कि राजगद्दी पर बैठने का आग्रह भी किया जाता है, परंतु चरणदास अपने वचनों पर अडिग रहता है।
उसकी सच्चाई, ईमानदारी और अडिगता समाज के खोखले नैतिकता की पोल खोल देती है। समाज अपने असली क्रूर और पाखंडी चेहरे को उजागर करता है, जहां एक सच्चा और सिद्धांतवादी व्यक्ति के लिए कोई स्थान नहीं है।
चरणदास चोर एक व्यंग्यात्मक, प्रेरणादायक और सोचने पर मजबूर कर देने वाला नाटक है, जो आज के समाज में सच्चाई और ईमानदारी की कीमत पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है।
नाटक में देवेन्द्र सिंह, मानसी, रजनी, मनोज कुमार, धीरज शर्मा, प्रतीक गर्ग, अर्जुन वर्मा, सन्नी, हिमांशु, यदुवंश, पंकज ने अपने अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा। नाटक का संगीत राजवीर राजू व पुलकित ने दिया। रंगकर्मी खूबराम सैनी, ऋषि सिंहल, विनोद शर्मा, सत्यप्रकाश, रविन्द्र, मयंक सैनी, गोविन्द, गजानंद ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया।