प्रवेश चाैहान रेवाड़ी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) नरेंदर पाल की अदालत ने युवती के अपहरण के आरोपी नौवीं के छात्र को जमानत देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा, उसे हिरासत में रखा तो शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। यह न्याय के उद्देश्य के अनुकूल नहीं होगा।
नाबालिग के अधिवक्ता की तरफ से अदालत में दलील दी गई कि वह केवल 15 वर्ष का है और अप्रैल से हिरासत में है। उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कहा, मुख्य आरोपी और उसके साथियों पर गंभीर आरोप हैं जबकि नाबालिग पर कोई ठोस आरोप नहीं हैं।
दूसरी तरफ लोक अभियोजक विकरण ने जमानत का विरोध करते हुए कहा, अपराध गंभीर प्रकृति का है। जमानत देने से न्याय के उद्देश्यों को ठेस पहुंचेगी।
न्यायाधीश नरेंदर पाल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा, गवाहों ने नाबालिग की पहचान नहीं की है। अपराध की गंभीरता जमानत न देने का आधार नहीं हो सकती।
कहा कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 12 के अनुसार नाबालिग को सामान्य रूप से जमानत दी जानी चाहिए। जमानत तभी रोकी जा सकती है जब यह स्पष्ट हो कि रिहाई से वह किसी अपराध की संगति में आ जाएगा या शारीरिक, मानसिक अथवा नैतिक खतरे में पड़ जाएगा। संवाद