कोसली। लगातार हो रही बारिश से जहां जनजीवन अस्तव्यस्त हुआ है वहीं खेतों में जलभराव से फसलें बर्बाद हो रही हैं। खेतों में काट कर रखी गई बाजरे की फसल गल रही है। बाजरे की बालियों में अंकुरण शुरू हो गया है।
बारिश से कपास की फसल भी नष्ट होने लगी है। ग्वार की फसल में अधिक बारिश से चुरिया रोग का प्रकोप है। किसानों का कहना है कि इस बार की स्थिति वर्ष 1995 की बाढ़ जैसी है। उस दौरान सितंबर में भारी बारिश से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया था। किसानों को औने पौने दाम पर अपने पशु बेचने पड़े थे।
वैसा ही खतरा इस बार भी मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि उनके सामने प्राकृतिक विपदा खड़ी है और उनसे निपटने के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
किसानों का कहना है कि बाजरा पूरी तरह गल रहा है। खेतों में पड़ी कडबी खराब हो रही है। पशुओं के चारे की किल्लत पैदा हो गई है।
कोसली क्षेत्र में लगभग 20 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। इसमें से लगभग पांच हजार हेक्टेयर पर कपास, दस हजार हेक्टेयर पर बाजरा और एक हजार हेक्टेयर पर ग्वार की बिजाई की गई थी। इस बार बारिश ने फसलों को चौपट कर दिया है।
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-बारिश से बाजरा और कपास की फसल बर्बाद हो गई है। बाजरे की बालियां काली पड़ चुकी हैं। कड़बी सड़ गई है। सरकार ने किसानों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए पोर्टल नहीं खोला है। सरकार तुरंत पोर्टल खोले और किसानों की मदद करे।- पूर्ण सिंह, भाकली।
- ऐसी स्थिति 1995 में हुई थी। मात्र तीन दिन की बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। हमारे सामने अगली फसल की कोई उम्मीद नहीं बची। सरकार जल्द क्षतिपूर्ति पोर्टल खोले।- मनोज कुमार, कोहारड़।
- तीन दिन से हो रही बारिश से बाजरा, कपास और ग्वार की फसल खराब हो गई है। बारिश के कारण किसान कर्जदार हो गए है। सरकार खराब फसल का मुआवजा दे ताकि किसानों को राहत मिल सके।-सुरेंद्र यादव, भड़ंगी।
- तीन दिन से हो रही बारिश से बाजरे की फसलें नष्ट हो गई हैं। खेतों में जलभराव के कारण अगली फसल की उम्मीद भी टूट रही है। सरकार ने आर्थिक मदद नहीं की तो किसान बर्बाद हो जाएंगे।-प्यारेलाल, किसान, जाहिदपुर।