रेवाड़ी। शहर निवासी डॉ. मुकुट अग्रवाल ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि भारतीय साहित्य और संस्कृति के महान रचनाकार हैं। आदिकवि के रूप में प्रतिष्ठित उनकी रामायण केवल धार्मिक आस्था का ग्रंथ नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, नैतिकता, कर्तव्य और न्याय का संदेश देने वाली रचना है। आज के दौर में उनकी शिक्षाएं पत्रकारिता के लिए भी प्रासंगिक हैं।
आगे बताया कि महर्षि वाल्मीकि से जुड़ी प्रचलित परंपरा में क्रौंच पक्षी के वध से उत्पन्न करुणा को प्रथम श्लोक की रचना का प्रेरक प्रसंग माना जाता है। यह प्रसंग बताता है कि संवेदना सृजन की शक्ति बन सकती है। इसी तरह पत्रकारिता का दायित्व केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि पीड़ितों, वंचितों और कमजोर वर्गों की आवाज को सम्मानपूर्वक सामने लाना भी है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल माध्यमों ने समाचारों की गति बढ़ाई है, लेकिन तेजी के साथ तथ्यात्मक शुद्धता बनाए रखना भी आवश्यक है। उत्तेजक शीर्षकों और भ्रामक सामग्री से बचते हुए संवेदनशील भाषा का प्रयोग समाज में सद्भाव बनाए रखने में सहायक होता है।