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राष्ट्रवाद के दीप जलें, हो रामराज सी दीवाली

Wed, 11 Nov 2015 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रेवाड़ी
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अखिल भारतीय साहित्य परिषद की रेवाड़ी शाखा की ओर से परिषद के संरक्षक डॉ. लक्ष्मीनारायण शर्मा के सेक्टर तीन स्थित निवास पर दीपोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर जहां कवियों ने दीये एवं दीवाली के महत्व पर प्रकाश डाला, वहीं राष्ट्रवाद एवं महंगाई पर भी शब्दों के पटाखे फोड़े। काव्य गोष्ठी में साहित्य प्रेमियों के साथ-साथ उभरते युवा कवियों ने भी काव्य पाठ किया।
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परिषद के महामंत्री गोपाल वशिष्ठ ने बताया कि दीवाली के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत पंडित दिलीप शास्त्री, डॉ.एलएन शर्मा एवं परिषद के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष रमेशचंद्र शर्मा ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण करके की। परिषद के अध्यक्ष राजेंद्र निगम राज की अध्यक्षता में चली काव्य गोष्ठी में कवयित्री इंदु राज निगम ने सरस्वती वंदना से गोष्ठी का शुभारंभ किया। इस मौके पर वरिष्ठ कवि प्रो.रमेश शर्मा ने ‘मानता हूं ज्योति मेरी मंद है, जानता हूं आयु भी अल्प है, किंतु जलना है मुझे भोर तक, हे हवाओं यह मेरा संकल्प है’ कविता पेश की तो राजेंद्र निगम ने ‘खिल-पताशे, लड्डु-बर्फी, फल-मेवा सब भूल गए, फीका हर त्यौहार हुआ मंदी के इस दौर में’ कविता से महंगाई पर कटाक्ष किया। गोपाल वशिष्ठ ने कहा- ‘राष्ट्रवाद के दीप जलें, छाए हर घर में खुशहाली, रामराज हो भारत में हो रामराज सी दीवाली’। पंडित दिलीप शास्त्री ने  आज के दौर में कंठ में क्रंदन की बजाय हुंकार पैदा करने की बात कही। कवयित्री दर्शना शर्मा, त्रिभुवन भटनागर ने कविता पेश की। इसके अतिरिक्त पंडित गणेश दत्त शर्मा, आरपी मुदिगल, पंडित श्रीनिवास शास्त्री, डॉ कंवर सिंह, महेंद्र मधुर, सुधीर भार्गव, सुमन यादव, उपासना गुप्ता, भूपेंद्र वशिष्ठ, नितिन कौशिक, अंकित शर्मा, बेबी समर्पिता आदि ने भी दीपोत्सव पर अपने विचार रखे। इस दौरान डॉ कंवर सिंह एवं महेंद्र मधुर की ओर से परिषद की काव्य गोष्ठी कराने का प्रस्ताव रखा गया जिसे परिषद की ओर से सहर्ष स्वीकार कर लिया गया।
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