रेवाड़ी।जिला न्यायिक परिसर के बाहर बावल रोड पर लंबे समय से खाने-पीने की रेहड़ियां लगाने वाले करीब दो दर्जन से अधिक विक्रेताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वन विभाग की ओर से कोर्ट परिसर के साथ लगती जमीन पर तारबंदी कराई जा रही है। रेहड़ी संचालकों का कहना है कि तारबंदी के बाद उन्हें अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा।
बावल रोड पर वर्षों से छोले-भटूरे, टिक्की, दही-भल्ले, चाय और कुलचे सहित अन्य खाद्य पदार्थों की रेहड़ियां लगती हैं। कोर्ट में रोजाना बड़ी संख्या में आने वाले लोगों और आसपास के लोगों के लिए ये रेहड़ियां सस्ता और आसानी से उपलब्ध भोजन का प्रमुख साधन हैं। संचालकों के अनुसार तारबंदी के बाद उनके सामने दूसरी जगह कारोबार करने का विकल्प नहीं है।
दही-भल्ले की रेहड़ी लगाने वाले सोनू भारद्वाज ने बताया कि वह करीब 22 वर्षों से इसी स्थान पर कारोबार कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। अब तारबंदी के कारण उनकी आजीविका प्रभावित होने की आशंका है।
छोले-भटूरे बेचने वाले पप्पू केवट ने बताया कि वह 20 वर्षों से अधिक समय से यह काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि रेहड़ी लगाने की जगह नहीं मिलने पर कारोबार पूरी तरह बंद हो जाएगा।
चाय विक्रेता रामस्वरूप ने बताया कि वह दो दशक से अधिक समय से चाय बेचकर परिवार चला रहे हैं। वहीं अशोक कुलचे वाले ने कहा कि वह करीब 22 वर्षों से कारोबार कर रहे हैं और उनके साथ काम करने वाले कई मजदूरों की रोजी-रोटी भी इससे जुड़ी है।
रेहड़ी संचालकों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें वैकल्पिक और उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका कारोबार चलता रहे और परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो।