संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। फ्लाइंट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव पढ़ने में काफी होशियार थे। प्रमोशन के बाद वह उस स्कूल में गए थे जहां उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई थी। उस दौरान सिद्धार्थ ने यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल आने का वादा किया था जो अधूरा रह गया। उन्हें अपने स्कूल से लगाव था।
सिद्धार्थ जब फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर प्रमोट हुए तो रेवाड़ी के एक निजी स्कूल में पहुंचे थे। जहां वे अपने पुराने क्लासरूम में भी गए थे। इस दौरान प्रिंसिपल से उन्होंने दोबारा आने की बात कही थी। सिद्धार्थ यादव के पिता सुशील यादव एयरफोर्स में थे। इसलिए जहां उनकी तैनाती रही, वहीं सिद्धार्थ की पढ़ाई हुई। सिद्धार्थ ने पहले केंद्रीय विद्यालय-1, एयरफोर्स स्कूल जोधपुर से पढ़ाई की। इसके बाद बैंगलोर एयरफोर्स स्कूल और फिर जोधपुर में एयरफोर्स स्कूल में पढ़ाई की। पिता और स्कूल के माहौल की वजह से सिद्धार्थ ने भी एयरफोर्स में जाने की ठान ली। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिद्धार्थ ने एयरफोर्स में जाने की तैयारी शुरू कर दी थी। साल 2016 में उन्होंने एनडीए की परीक्षा पास कर ली। इसके बाद 3 साल तक ट्रेनिंग हुई। सिद्धार्थ ने फाइटर पायलट के तौर पर एयरफोर्स जॉइन की। एयरफोर्स में ट्रेनिंग समेत 5 साल की सर्विस पूरी होने के बाद वह 2020 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट बन गए।