रेवाड़ी। जिले में हवा की गुणवत्ता लगातार तीसरे दिन सुधरने के बाद शनिवार को एक खराब हो गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक दोबारा रेड जोन में पहुंच गया और अधिकतम स्तर 302 दर्ज किया गया। यह स्तर गंभीर श्रेणी में माना जाता है जो आमजन के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। जिले में अचानक बढ़े प्रदूषण ने लोगों के साथ-साथ प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।
पिछले कुछ दिनों में हवा की गति बढ़ने और धूल कम होने के कारण एक्यूआई में सुधार देखा गया था और स्तर 300 के नीचे आ गया था लेकिन शनिवार सुबह से ही वातावरण में धुंध की परत और धूलकणों की मात्रा बढ़ने लगी।
खासतौर पर सुबह-शाम के समय दृश्यता कम रही और लोगों को आंखों में जलन व सांस लेने में दिक्कत की शिकायतें आने लगीं। चिकित्सकों ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए बच्चों, बुजुर्गों और दमा के रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
सर्कुलर रोड, दिल्ली रोड, धारूहेड़ा, बावल, हाईवे किनारे औद्योगिक क्षेत्र और शहर की मुख्य सड़कों पर प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा दिखाई दिया।
इन क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही, निर्माण कार्य, धूल उड़ने और औद्योगिक गतिविधियों के कारण एक्यूआई तेजी से बढ़ा। उद्योगों के आसपास धूलकणों की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक पाई गई।
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ठोस अपशिष्ट जलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन ने बढ़ते खतरे को देखते हुए नगर परिषद, निर्माण एजेंसियों और औद्योगिक इकाइयों को तुरंत पानी का छिड़काव बढ़ाने, सड़कों की नियमित सफाई करने और निर्माण स्थलों को ढकने के निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही खुले में कूड़ा या ठोस अपशिष्ट जलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस सीजन का सबसे खतरनाक प्रदूषण स्तर 2 नवंबर को दर्ज हुआ था, जब एक्यूआई 434 पहुंच गया था। इसके अलावा दीपावली पर 412 और 31 अक्तूबर को 406 दर्ज किया गया था।