संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। सिविल अस्पताल में ऑपरेशन के मामले बढ़ने से अब ऑपरेशन की तिथि एक माह बाद मिल रही है। आयुष्मान भारत योजना के तहत पैनल वाले निजी अस्पतालों में अब मोतियाबिंद, बच्चेदानी और दूरबीन से पित्त की थैली के ऑपरेशन के साथ ही सांस-दमा व उल्टी-दस्त से जुड़ी बीमारियों का इलाज बंद कर दिया गया है। अब ये मामले भी सिविल अस्पताल में ही आएंगे।
सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत अबतक 114 तरह के इलाज की सुविधा मिल रही थी। इसमें मोतियाबिंद, बच्चेदानी और दूरबीन से पित्त की थैली के ऑपरेशन के साथ ही सांस-दमा व उल्टी-दस्त से जुड़ी बीमारियां भी जुड़ गई हैं। ऐसे में अब अस्पताल में आयुष्मान के तहत 119 बीमारियों का इलाज होगा।
सिविल अस्पताल में पहले ही मोतियाबिंद और पित्त की थैली के ऑपरेशन मामले अधिक आते रहे हैं। सीएचसी और कोसली एसडीसीएच में ये ऑपरेशन नहीं होते हैं जिससे वहां के मरीजों को भी सिविल अस्पताल में ही रेफर किया जाता है।
सर्जन के पास ओपीडी ज्यादा होने से ऑपरेशन की तिथि एक महीने बाद मिल रही है। सिविल अस्पताल में 1 माह के दौरान पित्त की थैली के 25 से ज्यादा ऑपरेशन होते हैं।
अगर आयुष्मान के तहत ऑपरेशन के मामले अधिक आए तो ऑपरेशन की तारीख और बढ़ सकती है। सिविल अस्पताल में दो सर्जन हैं, जिनमें एक ओपीडी में तो दूसरे की ड्यूटी ओटी में होती है। एक दिन में अधिकतम 3 या 4 ही ऑपरेशन हो पाते हैं।
ऐसे ही मोतियाबिंद और बच्चेदानी के ऑपरेशन भी सिविल में हो रहे हैं। इसके अलावा आयुष्मान से संबंधित सांस व दमा और उल्टी-दस्त के मरीज भी अब सिविल अस्पताल में उपचार कराएंगे।
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आयुष्मान के तहत 5 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की व्यवस्था है। वर्ष 2018 से संचालित इस योजना में पहले से मौजूद बीमारियों और गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया था।
लाभार्थी कहीं पर भी पैनल वाले अस्पताल में इन मेडिकल सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। हरियाणा में अलग से चिरायु योजना भी शुरू की थी, लेकिन अब इन 5 बीमारियों को सरकारी अस्पताल में जोड़ा गया है।
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नोटिस भेजा... पांच बीमारियों का उपचार किया तो नहीं होगा भुगतान
सिविल सर्जन की ओर से सभी निजी अस्पतालों को नोटिस भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि वे आयुष्मान के तहत मोतियाबिंद, बच्चेदानी और दूरबीन से पित्त की थैली के ऑपरेशन के साथ सांस-दमा व उल्टी-दस्त से जुड़ी बीमारियों का इलाज नहीं करें। आयुष्मान कार्ड धारकों को यदि इन 5 बीमारियों का इलाज उपलब्ध कराया गया तो उसका भुगतान नहीं किया जाएगा। एनएचएम के अधिकारियों को पोर्टल भी जल्द अपडेट करने को कहा है, ताकि अगर कोई निजी अस्पातल में इन 5 बीमारियों का इलाज करना भी चाहे या गलती से कर दें तो पोर्टल उसके खर्च को स्वीकार नहीं करेगा।
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वर्जन
सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान के तहत अबतक 114 तरह के इलाज की सुविधा मिल रही थी। अब इसमें 5 और जुड़ गई हैं। अब 119 तरह के इलाज की सुविधा मिल रही है। सरकार का यह सराहनीय कदम है। - डॉ. भंवर सिंह, डिप्टी सिविल सर्जन