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Rewari News: अदालत ने चोरी मामले में सुनाया फैसला, दोषी को प्रोबेशन पर मिली राहत

Sat, 04 Oct 2025 12:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौरभ कुमार की अदालत ने चोरी के एक मामले में आरोपी मोहम्मद दीन को चोरी की धारा 380 व घर में घुसपैठ की धारा 457 से बरी कर दिया लेकिन चोरी की संपत्ति अपने कब्जे में रखने का दोषी मानते हुए उसे आईपीसी की धारा 411 में दोष सिद्ध ठहराया। अदालत ने आरोपी को प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दिया।
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यह मामला 15 फरवरी 2015 का है। गांव पुनसिका निवासी राकेश यादव ने पुलिस को शिकायत दी थी कि प्लाॅट बंधी उनकी भैंस और बछड़े को रात में कोई चोरी कर ले गया। पुलिस ने जांच के दौरान गांव भदौज के जंगल से एक पिकअप बरामद की, जिसमें चोरी भैंस और बछड़ा मिला। वाहन मालिक मोहम्मद दीन को गिरफ्तार किया गया।
ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के बाद 2019 में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी ने मोहम्मद दीन को धारा 457 और 380 आईपीसी में दोषी ठहराकर सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी ने अपील दायर की थी।
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अपील की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियोजन गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं। शिकायत प्रारंभ में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज हुई थी और बाद में आरोपी का नाम जोड़ा गया। पहचान परेड नहीं कराई गई। किसी गवाह ने प्रत्यक्ष रूप से आरोपी को चोरी करते नहीं देखा।
अदालत ने कहा कि अभियोजन इस बात को साबित करने में विफल रहा कि आरोपी ने सीधे तौर पर घर में घुसकर चोरी की। शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के बयानों में सुधार व विरोधाभास पाए गए। साथ ही पुलिस जांच में भी कई खामियां सामने आईं, जैसे कि मौके पर जाकर निरीक्षण न करना और पहचान परेड न कराना।
फिर भी यह तथ्य अदालत में प्रमाणित हुआ कि चोरीशुदा भैंस और बछड़ा आरोपी की पिकअप गाड़ी से बरामद हुए। वाहन की रजिस्ट्री और कब्जे से जुड़े दस्तावेज भी आरोपी के नाम पर थे। इस आधार पर अदालत ने कहा कि आरोपी चोरी की संपत्ति अपने पास रखने का दोषी है।

फैसला और सजा में बदलाव
अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित किया। आरोपी को धारा 457 और 380 बरी कर दिया गया लेकिन धारा 411 में दोषी ठहराया गया। सजा पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी की पारिवारिक परिस्थितियों, उसकी उम्र और इस तथ्य को ध्यान में रखा कि उसका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। आरोपी नौ बच्चों का पिता और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उसे प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट, 1958 की धारा 4 के तहत एक वर्ष की प्रोबेशन पर छोड़ने का आदेश दिया। इसके तहत आरोपी को जमानती बांड पेश करना होगा। इस अवधि में वह किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा अन्यथा उसे दोबारा अदालत में सजा भुगतने के लिए बुलाया जा सकता है।
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क्या होता है प्रोबेशन
अधिवक्ता कैलाश चंद ने बताया कि प्रोबेशन को आमतौर पर पर्यवेक्षण या निगरानी पर छोड़ा जाना कहा जाता है। इसका मतलब है कि कोर्ट कुछ नियमों के साथ किसी अपराधी को पूरी सजा जेल में काटने की बजाय समाज में रहने की अनुमति दे देती है। सरल भाषा में कहें तो इस प्रक्रिया में वो अपराधी जेल नहीं जाता बल्कि आम लोगों की तरह उनके बीच ही रहता है, लेकिन उसे कुछ नियमों का पालन करना होता है। इस प्रक्रिया में कोर्ट की ओर से अपराधी को बाहर रहकर ही सुधरने का मौका दिया जा सकता है।
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