धारूहेड़ा। नगर पालिका धारूहेड़ा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सत्यनारायण उर्फ अजय जांगड़ा और 18 वार्डों के पार्षदों ने सोमवार को नगर पालिका कार्यालय में आयोजित समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली। अध्यक्ष और पार्षदों ने नगर के विकास और जनसेवा को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया।
शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही 54 दिनों से चल रहा इसको लेकर चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया। समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह रहे। उनके साथ बावल के विधायक डॉ. कृष्ण कुमार और कोसली के विधायक अनिल यादव भी मौजूद रहे। विधायक लक्ष्मण सिंह कार्यक्रम में नजर नहीं आए।
नगर पालिका का कार्यकाल 17 जून को समाप्त हो चुका था और 10 मई को चुनाव संपन्न हुए थे। इसके बाद से शपथ ग्रहण में देरी के कारण नगर क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित बताए जा रहे थे। सफाई, सड़क मरम्मत, जल निकासी और अन्य बुनियादी कार्यों की गति धीमी पड़ गई थी, जिससे स्थानीय लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा।
अब शपथ ग्रहण पूरा होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि नगर पालिका के विकास कार्यों में तेजी आएगी और लंबित योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष वंदना पोपली, जिला प्रमुख मनोज यादव, सुनील मूसेपुर, अनिल रायपुर, हिमांशु पालीवाल तथा भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष हुकमचंद सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
इन्होंने ली है शपथ
वार्ड एक से कविता बुधवार, वार्ड दो से देवेंद्र कुमार शर्मा और वार्ड तीन से त्रिलोक सिंह धारीवाल शपथ लेंगे। वार्ड चार से निहाल सिंह, वार्ड पांच से गोपाल और वार्ड छह से कृष्णा देवी भी शपथ ग्रहण करेंगे। वार्ड सात से मोनिका, वार्ड आठ से अमन राव और वार्ड नौ से रंजन यादव ने शपथ ली। वार्ड 10 से अमित यादव, वार्ड 11 से रीना रानी और वार्ड 12 से धर्मवीर ने शपथ ली। वार्ड 13 से प्रिया कुमारी, वार्ड 14 से अनिल कुमार और वार्ड 15 से किरण, वार्ड 16 से मनीषा सैनी, वार्ड 17 से मंशा सैनी और वार्ड 18 से सुमित्रा देवी ने शपथ ली है।
शपथ ग्रहण न होने से विकास कार्य हो रहे थे प्रभावित:
नगर पालिका धारूहेड़ा में शपथ ग्रहण समारोह समय पर आयोजित न होने के कारण क्षेत्र में विकास कार्यों पर असर पड़ रहा था। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी न होने से कई महत्वपूर्ण योजनाएं और कार्य अधर में लटके हुए हैं, जिससे जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क, सफाई, जल निकासी और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई कार्य रुके हुए हैं। बरसात के मौसम में जलभराव और सफाई व्यवस्था जैसी समस्याएं पहले से ही चुनौती बनी हुई हैं।