कार्यक्रम में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह का स्वागत करते कांग्रेस नेता। स्रोत : प्रवक्ता
बावल(रेवाड़ी)। पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा बुधवार को बावल पहुंची। उन्होंने टिकला गांव के मंदिर में माथा टेकर अपनी यात्रा आरंभ की। यात्रा का गांव टीकला, नांगल तेजू, शाहपुरा, तिहाडा, साबन सहित विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा स्वागत किया गया।
इसके बाद बृजेंद्र सिंह आंबेडकर पार्क पहुंचे जहां उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यात्रा से बच रहे हैं लेकिन वे भी जल्द जुड़ेंगे। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में आते ही भाजपा ने योजनाओं के नाम बदलना शुरू कर दिया और गांवों में उसका कोई पकड़ नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वोट मांगने नहीं आए हैं बल्कि भाजपा गांवों का भाईचारा तोड़कर वोट बैंक बनाती है। एक सवाल के जवाब में बृजेंद्र सिंह ने कहा कि सद्भावना यात्रा ढाई महीने पहले शुरू की गई थी। कुछ लोगों की आदतें बिगड़ गई हैं और 12 साल से संगठन नहीं बनने दिया गया। कहा कि चुनाव परिणाम विपरीत आए लेकिन कुछ लोग अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
नेताओं की अनुपस्थिति ने पार्टी की आंतरिक कलह को किया उजागर
यात्रा में जिलाध्यक्षों व बड़े नेताओं के शामिल नहीं होने के साथ ही इन प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति ने पार्टी की आंतरिक कलह को उजागर किया।गांव टिकला में सद्भाव यात्रा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने बिना नाम लिए पार्टी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता ऐसे हैं जो यात्रा में आने से छिप गए। छिपने की बजाय आदमी को मर्द बनना चाहिए। सभी को एकता की बात करनी चाहिए। कैप्टन अजय सिंह ने आगे कहा कि वे पूरी तरह बृजेंद्र सिंह के साथ हैं और किसी का डर नहीं है और कोई मेरी भैंस भी नहीं खोल सकता। उन्होंने स्पष्ट किया जो आएगा उसका स्वागत करेंगे। कुमारी शैलजा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा या कोई भी आएगा, उसका स्वागत किया जाएगा। दूसरी ओर गैरहाजिर रहे दोनों जिला अध्यक्षों ने अपनी गैरमौजूदगी का कारण बताते हुए कहा कि वे पार्टी के कार्य से चंडीगढ़ गए हुए थे।
मनरेगा को खत्म करने का काम किया
पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने 2014 में सत्ता में आने के बाद ही मनरेगा को खत्म करने का काम शुरू कर दिया था। सरकार ने अब भी मनरेगा का केवल नाम नहीं बदला है बल्कि इसे खत्म करने के लिए बढ़ाया गया एक और कदम है। आज प्रदेश बेरोजगारी की चपेट में है और प्रदेश के युवा अपनी जमीन जायदाद बेचकर काम के लिए विदेश भाग रहे हैं।