रेवाड़ी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जोगिंद्री की अदालत ने सड़क दुर्घटना के साढ़े चार साल पुराने मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा जिसके चलते अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ दिया।
यह मामला धारूहेड़ा थाना क्षेत्र का है। 17 नवंबर 2019 को दुर्घटना की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में गोकलपुर निवासी कृष्ण कुमार पर लापरवाही से वाहन चलाने और दुर्घटना में गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता लोकेश यादव ने आरोप लगाया था कि हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं।
पुलिस ने मामले की जांच कर वाहन को कब्जे में लिया और मैकेनिकल जांच कराई गई। आरोपी कृष्ण को मार्च 2020 में गिरफ्तार किया। बाद में डॉक्टर की राय के आधार पर धारा 338 जोड़ी गई और अदालत में चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल छह गवाह पेश किए।
मामले का अहम मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता लोकेश यादव और उसके पिता दोनों ही अदालत में अपने पहले के बयानों से मुकर गए। दोनों गवाहों ने न तो कृष्ण की पहचान की और न ही दुर्घटना के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया। अभियोजन पक्ष द्वारा जिरह भी की गई, लेकिन कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आ सका।
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आरोपी की पहचान ही प्रमाणित नहीं हो सकी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी की पहचान ही प्रमाणित नहीं हो सकी, जो इस मामले की बुनियाद थी। ऐसे में अन्य औपचारिक गवाहों के बयान भी दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माने जा सकते। इसी आधार पर अदालत ने कृष्ण को सभी आरोपों से बरी कर दिया।