संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। एमटीपी किट बेचने वाले दुकानदारों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पांच सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम मेडिकल स्टोर पर जाकर एमटीपी किट के स्टाक, किट किसे और कब वितरित किया गया, इसका विवरण एकत्रित करेगी।
टीम अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराने आने वाली महिला से संबंधित फार्म एफ के साथ आरसीएच नंबर के अंतर्गत मांगी गई जानकारी का विवरण देखेगी। आरसीएच नंबर के माध्यम से संबंधितमहिला के स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारी ली जा सकती है। गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण करने के समय से लेकर शिशु के जन्म तक उपलब्ध कराई जाने वाली सभी सुविधाएं अपडेट होती हैं। जन्म से लेकर दो वर्ष तक बच्चों को नियमित टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराए जाने का ब्योरा मिलेगा। बिगड़ते लिंगानुपात को संतुलित करने के लिए सरकार और स्वास्थ्य विभाग नई तरकीब पर काम कर रही है। इसके तहत अब प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) पहचान नंबर भी दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसमें अल्ट्रसाउंड केंद्रों और जटिल कारण से गर्भपात कराने वाली महिलाओं का विवरण अस्पताल के चिकित्सकों के लिए जरूरी किया है। इससे आयुष्मान, आधार नंबर की तरह आरसीएच नंबर से उनका विवरण आनलाइन होने से मरीज का विवरण कहीं भी आसानी से देखा जा सकता है। इसमें इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का भी सहयोग लिया जा रहा है।
दिसंबर 2024 में 930 रहा औसत लिंगानुपात
दिसंबर 2024 में जिले में एक हजार लड़कों पर 930 लड़कियों का जन्मदर रहा। पूरे साल के दौरान जिले का औसत लिंगानुपात 900 के आसपास रहा है। जिले के कई गांवों में बालिकाओं का जन्मदर काफी कम है। गांव झोलरी में एक हजार पर लड़कियों का जन्मदर 333 रहा। इसी प्रकार गांव गामड़ी में 750, गुड़ियानी में 500, गुज्जरवास में 500, किशनपुर में 600, पावटी में 400, गुजरीवास में 500, आसलवास में 500, डहीना में 500, औलांत में 500, मसीत में 500, दिदोली में 500 और बव्वा में लिंगानुपात 500 रहा। आरसीएच पहचान नंबर से लिंगानुपात में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों मानना है कि अभी तक गर्भपात (एमटीपी) करते वक्त या अल्ट्रासाउंड के दौरान भ्रूण लड़का था या लड़की इसका उल्लेख नहीं करते थे। अब अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों को गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करते वक्त फार्म एफ भरने के साथ आरसीएच आइडी नंबर लिखना जरूरी होगा। आरसीएम नंबर से गर्भपात कराने वाली महिला के पहले कितनी संतान हैं और यह लड़का है या लड़की, पहले भी किसी कारण से गर्भपात हुआ है या फिर पहले की संतान के बाद कितने अंतराल पर दूसरी या तीसरी संतान का भी विवरण उल्लेख करना होगा आदि विवरण आनलाइन दर्ज होगा।
वर्जन
गठित की गईं टीमें आईएमए के सहयोग से गर्भपात और अल्ट्रासाउंड से संबंधित रिकार्ड भी अपने पास रखेंगी। टीमें गर्भवती महिलाओं, दंपती व बच्चों का पूरा विवरण घर-घर जाकर एकत्रित करेंगी और उसे आरसीएच पोर्टल पर अपलोड करेंगी।-डाॅ. भंवर सिंह, उप सिविल सर्जन एवं पीएनडीटी नोडल अधिकारी।