रेवाड़ी। प्रदेश में गिरते भूजल स्तर और धान की खेती में अधिक पानी की खपत को देखते हुए हरियाणा सरकार ने मेरा पानी-मेरी विरासत योजना का विस्तार किया है। योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए जिले में 100 एकड़ भूमि को धान की खेती से हटाकर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों के तहत लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योजना के तहत किसानों को धान छोड़कर अन्य फसलें अपनाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष राज्यभर में 30 हजार एकड़ भूमि को धान से हटाने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद अगले चार वर्षों में इस क्षेत्र को बढ़ाकर 1.20 लाख एकड़ और वर्ष 2030-31 तक करीब 1.5 लाख एकड़ तक पहुंचाने की योजना है।
रेवाड़ी जिले में भले ही धान का रकबा प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में कम है, लेकिन जल संरक्षण के उद्देश्य से यहां भी किसानों को वैकल्पिक फसलों के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
योजना के तहत धान की जगह कम पानी वाली फसलें अपनाने वाले किसानों को 8 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा दलहन, तिलहन और कपास जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए 2 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा।
किसान इस योजना के तहत अधिकतम 10 हजार रुपये प्रति एकड़ तक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे। सरकार ने योजना के लिए 24 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
कृषि विभाग के अनुसार रेवाड़ी सहित प्रदेश के कई जिलों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। प्रदेश के करीब 24 प्रतिशत क्षेत्र में भूजल स्तर 30 मीटर से अधिक नीचे पहुंच चुका है। कृषि क्षेत्र में ही 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी की खपत होती है।
ऐसे में सरकार किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिनमें सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया 18 मई से शुरू हो चुकी है। प्रदेश में अब तक हजारों किसानों ने इस योजना के लिए अपना पंजीकरण कराया है।