रेवाड़ी। कोरोनाकाल के चलते वर्ष 2020 सत्र में सम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन में कुछ महाविद्यालयों की गलती से शून्य नंबर विवि को भेज दिए गए। जिससे ये विद्यार्थी परीक्षा परिणाम में अनुत्तीर्ण दिखा दिए गए। महाविद्यालयों के चक्कर काटने के बाद भी समाधान नहीं होने से छात्र संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
इसके अलावा कुछ विद्यालयों ने अपनी गलती में सुधार करते हुए नंबर भेज दिए हैं, लेकिन अभी भी कुछ विद्यालयों के मुखियाओं के अड़ियल रवैये के चलते इसका समाधान नहीं हो पाया है।
विद्यार्थियों के अनुसार कोरानाकाल के चलते वर्ष 2020 में सम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को प्रमोट किया गया था। उसमें आकलन प्रक्रिया में आंतरिक मूल्यांकन को ढाई गुना किया गया था। कुछ महाविद्यालयों में अध्यापक द्वारा गलती की वजह से आंतरिक मूल्यांकन में शून्य नंबर दे दिए गए थे। जिनको कुछ महाविद्यालयों जैसे केएलपी ने लिखित में भी दिया कि यह गलती महाविद्यालय से हुई है और विद्यार्थियों के नंबर अपडेट किए जाएं। इसके लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दो बार केएलपी महाविद्यालय में आंदोलन किए थे। परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन सभी विद्यार्थियों के आवेदन लिए। परिषद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इसके बारे में 6 ज्ञापन भी दिए व दो आंदोलन भी किए। आज एक साल बाद भी उन विद्यार्थियों का रिजल्ट अपडेट नहीं हो पाया है।
आंतरिक अंकों को नोटिस बोर्ड पर लगाना जरूरी
छात्र संगठनों के अनुसार यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ने सभी कॉलेज प्रशासन को एक मेल भी किया। बताया गया कि महाविद्यालयों को यूनिवर्सिटी में इंटर्नल मार्क्स भेजने से पहले उस सूची को नोटिस बोर्ड पर लगाना जरूरी है। इसके लिए यूनिवर्सिटी ने सभी को मेल के माध्यम से रिमाइंडर भी भेजा। यूनिवर्सिटी कैम्पस में भी इस नोटिस का पालन नहीं किया जा रहा। छात्रों का आरोप है कि आरडीएस महाविद्यालय, अहीर महाविद्यालय, राजकीय महाविद्यालय रेवाड़ी, राजकीय कन्या महाविद्यालय गुरावड़ा, राजकीय महाविद्यालय कोसली महाविद्यालयों ने आज तक कोई सूची जारी नहीं की।
आरडीएस की एबीवीपी इकाई अध्यक्ष मानसी यादव ने कहा कि प्रिंसिपल से मिलकर समस्या को समाधान करने की कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन में शून्य नंबर देना गलत है। नोटिस बोर्ड पर भी नंबरों को प्रकाशित नहीं किया गया। यदि इसका समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन के अलावा कोई चारा नहीं है।
इधर, आरडीएस की एबीवीपी इकाई मंत्री निशा यादव ने कहा कि 28 जुलाई से परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, लेकिन अभी तक आंतरिक मूल्यांकन में का मामले का समाधान नहीं किया गया है। इस तरह से विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम ही नहीं भविष्य भी प्रभावित होता है। महाविद्यालयों की गलतियों को विद्यार्थी भुुगत रहे हैं, जल्द से जल्द इसका समाधान होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।