सरकार एक तरफ जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की बात करती हैं दूसरी तरफ डाक्टरों व स्टाफ नर्सों की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है रेवाड़ी के सामान्य अस्पताल का। यहां मरीजों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। बुधवार रात को एक गर्भवती महिला मदद के लिए चार घंटे तक तड़पती रही लेकिन स्टाफ नर्स को अपना आराम और नींद पूरी करना ज्यादा जरूरी लगा। गर्भवती महिला के साथ आई महिलाओं ने मिलकर उक्त महिला की डिलीवरी करवाई।
गांव बोडिया कमालपुर निवासी मोनिका बुधवार रात करीब 12:00 बजे सामान्य अस्पताल में डिलीवरी कराने के लिए पहुंची। रात के समय वह करीब चार घंटे तक अस्पताल के प्रसूति विभाग में पड़ी तड़पती रही, लेकिन बार-बार गुहार लगाए जाने के बावजूद एक भी नर्स उसकी सुनने के लिए पास नहीं पहुंची। ऐसे में गर्भवती मोनिका की हालत बिगड़ते देख वहां मौजूद अन्य महिलाओं ने मिलकर उसकी डिलीवरी कराई। डिलीवरी के बाद भी वहां मौजूद नर्स ने मोनिका की कोई सुध नहीं ली। मोनिका के ससुर यशवंत सिंह ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने स्टाफ नर्सों को इस बारे में कहा तो उन्हें स्टाफ की ओर से धमकियां दी गई कि अगर इस बारे में उन्होंने कहीं कोई शिकायत की तो वह मोनिका की कोई देखभाल नहीं करेंगे।
रात्रि में आराम फरमाता है स्टाफ
रात्रि के समय प्रसूति विभाग व अन्य विभागों की स्टाफ नर्सों सहित विभाग का पूरा स्टाफ आराम फरमाता है। यहां भर्ती होने वाले मरीजों के परिजन रोजाना अस्पताल प्रशासन को कोसते रहते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कभी रात्रि के समय अस्पताल में मरीजों की सुध लेने नहीं पहुंचते।
पीड़ित पक्ष शिकायत करेगा तो होगी कार्रवाई: एसएमओ
अस्पताल के एसएमओ एके सैनी ने कहा कि उन्हें इस प्रकार की न तो कोई जानकारी है और न ही उन्हें शिकायत मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। उन्हाेंने कहा कि रात्रि में स्टाफ नर्साें के सोने की बात बिल्कुल गलत है। यदि ऐसा है तो उस पर भी ध्यान दिया जाएगा।