स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए नागरिक अस्पताल में 100 बेड वाला मल्टी स्पेशियलिटी ब्लॉक एक महीने के अंदर लिफ्ट का काम पूरा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा। ये कहना है पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों का। वहीं जर्जर हो चुकी पुरानी बिल्डिंग में रिपेयरिंग का काम होने से ओपीडी में आने वाले मरीजों और डॉक्टरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
परेशानी का सबसे बड़ा कारण ब्लॉक का तय समय सीमा के अंदर हैंडओवर नहीं होना है। योजना के मुताबिक नए ब्लॉक को नवंबर-2015 में पीडब्लयूडी विभाग द्वारा हैंडओवर किया जाना था।
लिफ्ट एवं रैंप नहीं होने के कारण हो रही है देरी..
100 बेड वाले ब्लॉक का निर्माण कार्य लगभग दो महीने पहले पूरा हो चुका है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने ब्लॉक पर ताला लगाया हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिल्डिंग 2015 में मिलने की बात हुई थी,लेकिन अभी तक यहां पर रैंप एवं लिफ्ट नहीं लग पाई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वह इससे पहले कई बार विधायक रणधीर सिंह कापडीवास सहित पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को लिख चुके हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा है। इधर पीडब्ल्यूडी विभाग का कहना है कि रैंप का ब्लॉक के अंदर कोई प्रावधान नहीं है। हैंडओवर में देरी केवल लिफ्ट के लिए हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि विभाग की इलैक्ट्रिक विंग को लिफ्ट लगानी है,उनकी ओर से निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया है।
रैंप नहीं होने पर अतिरिक्त सचिव लगा चुके हैं फटकार,पीडब्ल्यूडी ने किए हाथ खड़े
बीते दिनों में नागरिक अस्पताल के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सचिव पीके महापात्रा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बिल्डिंग में रैंप नही होने पर फटकार लगाते हुए कहा था कि पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से बात कर रैंप बनवाई जाएगी। उस वक्त महापात्रा ने पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को नागरिक अस्पताल में बुलवाकर इसके लिए निर्देश दिए थे। लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग ने केवल लिफ्ट लगाने की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं।
सुविधाओं के अभाव में परेशानी मरीजों को
नागरिक अस्पताल में रोजाना लगभग एक हजार ओपीडी होती है। बिल्डिंग के आभाव में एक जगह तीन डॉक्टरों को बैठना पड़ता है। वहीं रिपेयर का काम होने से डॉक्टरों के स्थान बदलने से भी मरीजों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इधर यदि ब्लॉक समय पर हैंडओवर हो गया होता तो यहां पर भर्ती मरीजों को बेड की समस्या से निजात मिल सकती थी। वहीं बेड के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी गॉयनी विभाग को उठानी पड़ रही है। यहां पर आलम यह है कि एक बेड को दो महिलाओं तक को शेयर करना पड़ रहा है।
-----------
वर्जन-नए ब्लॉक पर ताला लटका हुआ है। यदि ब्लॉक हैंडओवर कर दिया जाए तो यहां पर मरीजों की भीड़ कम होने के साथ ही सुविधाओं में बढ़ोतरी हो जाएगी।
-डॉ. सुदर्शन पंवार,एसएमओ
------
वर्जन-
ब्लॉक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यहां पर रैंप का कोई प्रावधान नहीं है। लिफ्ट का काम इलैक्ट्रिक ब्रांच को करना है,जो कि मई के पहले सप्ताह तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद बिल्डिंग को स्वास्थ्य विभाग को हैड ओवर कर दिया जाएगा।
-डीवीएस दहिया, एससी,पीडब्लयूडी