रेवाड़ी/बावल। सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाने और जागरूकता बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। 31 जनवरी को इसका अंतिम दिन था। बावल खंड के कई गांवों में ग्राम सभाएं आयोजित करने की योजना बनाई गई थी। इन गांवों में रूध, साबन, सैदपुर (उर्फ जैतपुर), सांझरपुर, शहबाजपुर, शेखपुर, सुबासेड़ी, सुलखा, सुठाना, सुठानी, टांकडी, टीकला और तिहाड़ा शामिल थे।
हालांकि अंतिम दिन कुछ गांवों में ग्राम पंचायतों का आयोजन हुआ, तो कई जगह किसी कारण से बैठकें नहीं हो सकीं। अधिकतर स्थानों पर कोरम पूरा नहीं होने के कारण ग्राम सभाओं को स्थगित करना पड़ा। सुठाना गांव की सरपंच रीना कुमारी ने बताया कि बैठक में ग्रामीणों की पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण स्थगित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि लगभग 40 प्रतिशत लोग ही शामिल हुए इसलिए बैठक पूरी नहीं हो सकी। नई तारीख जल्द ही जारी की जाएगी।
टीकला गांव की सरपंच अर्चना देवी ने बताया कि पहली बैठक बुलाई गई थी लेकिन कोरम पूरा न होने के कारण इसे स्थगित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब दूसरी बैठक जल्द ही आयोजित की जाएगी। साबन गांव के सरपंच संजय ग्रेवाल ने भी कहा कि पहली बैठक कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित करनी पड़ी थी। बैठक सात फरवरी को बुलाई गई है।
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इन गांवों में ये रही स्थिति
ओढ़ी के सरपंच प्रतिनिधि सुनील ने बताया कि कुछ दिन पहले बुलाई गई बैठक में भी कोरम पूरा नहीं हुआ था। इसलिए इसे जल्द ही दोबारा बुलाया जाएगा। नगली प्रसापुर के सरपंच पति नितेश कुमार ने बताया कि उनके गांव में पहले दो बैठकें हो चुकी हैं और तीसरी बैठक जल्द आयोजित की जाएगी। नरसिंहपुर गढ़ी के सरपंच प्रतिनिधि अंकुर ने कहा कि गांव में दो दिन पहले बैठक हो चुकी है। कोरम पूरा था। वहीं रामपुरा गांव के सरपंच नरेश यादव ने बताया कि बैठक रविवार को होगी। पदैयावास गांव के सरपंच प्रतिनिधि बिजेंद्र यादव ने कहा कि शुक्रवार को ग्राम सभा हुई थी लेकिन मानक के अनुसार ग्रामीणों की उपस्थिति पर्याप्त नहीं थी।
बैठक न लेने की सूचना ग्राम सचिव को दी जा चुकी
नांगल शहबाजपुर के सरपंच मनीषा ने बताया कि पहले 2 बैठकें कर ली थी। शनिवार को जरूर कार्य की वजह से बैठक नहीं ली जा सकी है। हालांकि 2 दिन के अंदर फिर से बैठक ली जाएगी। बैठक ना लेने की सूचना ग्राम सचिव को दी जा चुकी है।
इस वजह से विफल हो रहीं ग्राम पंचायतें
गांवों में काफी संख्या में ज्यादातर लोग नौकरी-पेशा वाले होते हैं या फिर व्यवसाय में व्यस्त होने के कारण ग्राम सभा में नहीं पहुंच पाते। परिवार का मुखिया ही ग्रामसभा में पहुंचता है। इससे सरपंच के लिए 40 फीसदी ग्रामीणों की भागीदारी ग्रामसभा में असंभव हो चुकी है। धारूहेड़ा खंड के सरपंच एसोसिएशन की प्रधान प्रियंका यादव ने बताया कि ग्रामसभा में 40 फीसदी ग्रामीणों की भागीदारी का प्रावधान पंचायतों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। नौकरीपेशा और अपने व्यवसाय में व्यस्त ग्रामीण ग्रामसभा में नहीं पहुंच पाते, जिससे कोरम पूरा नहीं हो रहा है।
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80 पंचायतों में बैठकें विफल रही
364 ग्राम पंचायतों में 17 जनवरी से 31 जनवरी तक पांच चरणों में ग्राम सभाएं आयोजित की जानी थीं। 17, 18, 24, 25 व 31 जनवरी को शेड्यूल अनुसार ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं को आयोजन की तारीखें रखी गई थीं। करीब 80 पंचायतों में बैठकें विफल गई हैं।
वर्जन
लोगों की भागीदारी बढ़ाने और पंचायतों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।-अनिल यादव, बीडीपीओ