09जेएनडी15: कर्नल डीके भारद्वाज।
- फोटो : सिजवाही गांव में हुए पथराव से सीएचसी में भर्ती घायल महिला लीलावती। संवाद
जींद। भारतीय सेना का गौरवशाली इतिहास रहा है। हमारे सैनिक देश की आन, बान और शान के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने में भी पीछे नहीं रहे।
जींद के सेवानिवृत्त कर्नल डीके भारद्वाज भी भारतीय सेना की अहम टुकड़ी का हिस्सा रहे हैं, जिसने सियाचीन चोटी पर कब्जा किया था। बाद में इसी जमीन के लिए पाकिस्तान से कारगिल युद्ध हुआ था।
डिफेंस कॉलोनी जींद के रहने वाले सेवानिवृत्त कर्नल डीके भारद्वाज बताते हैं साल 1984 में इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं। एक बार वह हवाई जहाज से सियाचिन से गुजर रही थीं।
उनके साथ तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल पीएन हून थे। इंदिरा ने हून से पूछा- यह भारत का हिस्सा है या पाकिस्तान का। इस पर हून ने कहा था कि यह एरिया पाकिस्तान का है, लेकिन किसी का कब्जा नहीं है। तब इंदिरा ने सियाचीन पर कब्जा करने के लिए कहा था।