शहर से सात किलोमीटर की दूरी पर दस हजार की आबादी वाले गांव करनावास में करीब चार साल पहले एचएसआईआईडीसी बावल की ओर से सीवर लाइन डालने का काम शुरू हुआ। इसके लिए 66 लाख रुपये भी मंजूर हुए, लेकिन करीब 37 लाख रुपये का काम होने के बाद इसका निर्माण रुक गया। इसके बाद बनी हुईं पक्की सड़कें उखड़ने के बाद धूल भरी टूटी-फूटी गलियों में तब्दील हो गईं।
तब से अब तक ग्रामीणों को गांव में आधी-अधूरी सीवर लाइन का पूरी का इंतजार है। इसके लिए ब्लॉक समिति मेंबर, गांव के नंबरदार एचएसआईआईडीसी के चक्कर लगाने के अलावा सीएम विंडो पर भी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अमर उजाला की टीम करनावास गांव पहुंची और हालातों का जायजा लिया। एक रिपोर्ट...
1.50 किलोमीटर में बनने थे 39 चैंबर
हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं संरचना विकास निगम लिमिटेड की ओर से मिली जानकारी के अनुसार गांव में 1.49 से ज्यादा मीटर की लंबाई तक सीवर लाइन डाली जानी थी। इस बीच लाइनों को लिंक करने के लिए 39 सीवर के मेनहोल लगने थे। ग्रामीणों के अनुसार सीवर के मेनहोल तो बने लेकिन कई जगह न तो पाइप लिंक किए गए और न ही कई जगह ढक्कन लगे।
खुले पड़े चैंबर बने हादसों का सबब
गांव के नंबरदार रामपाल ने बताया कि खुले पड़े चैंबर ढकने के लिए कई बार एचएसआईआईडीसी से कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। खुले पड़े चैंबरों में बरसात के समय कई बार जलभराव होने के समय खुले पड़े सीवर में गांव और आने-जाने वाले कई लोग गिरकर घायल भी हुए। जिसके बाद मजबूरी में ग्रामीणों ने सीवर को ईंट और मिट्टी से ढंक दिया।
-बनी-बनाई सडक़ भी हुई खराब
गांव के सरपंच सुभाषचंद कहते हैं कि गांव में सड़कें पीडब्लूडी की ओर से बनी हुई थीं। सीवर लाइन डालने के नाम पर सडक़ खोदकर काम शुरू किया गया। आधा-अधूरा काम हुआ। आधा-अधूरा काम होने के बाद रोक दिया गया। अब गांव में न तो सीवर की व्यवस्था है उल्टा अच्छी खासी सडक़ से भी ग्रामीण हाथ धो चुके हैं।
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करनावास में सीवर लाइन से संबंधित मामला संज्ञान में है। लेकिन मामले संबंधी विस्तृत जानकारी सोमवार को कार्यदिवस पर ही दी जा सकेगी।
-राकेश कुमार, एसडीओ, एचएसआईआईडीसी बावल
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आरटीआई के माध्यम से निर्माण संबंधी जानकारी ली गई है। सीएम विंडो पर शिकायत कर जल्द से जल्द सीवर लाइन का काम पूरा करने की मांग की गई है।
-पुष्पा देवी, सदस्य, ब्लॉक समिति रेवाड़ी