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मकर संक्रांति पर कड़ाके की ठंड, घर में दुबके लोग

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शहर में बावल रोड पर छाया कोहरा। - फोटो : Rewari
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मकर संक्रांति पर कड़ाके की ठंड ने जनजीवन बेहाल कर दिया। दिनभर सूरज देवता के दर्शन नहीं हुए। कोहरा व गलन तेज होने के कारण अधिकतर लोग घरों में ही दुबके रहे। वहीं न्यूनतम तापमान में ढाई डिग्री की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। कोहरा व ठंड से जहां आमजन परेशान हैं वहीं किसान के लिए खुशी है कि फसलों के लिए यह वरदान साबित होगी।
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शुक्रवार को सुबह से ही आसमान में बादल नजर आये। सुबह नौ बजे के बाद शीतलहर की वजह से कोहरा छंट गया लेकिन कंपकंपी और ठिठुरन बरकरार है। कोहरे के कारण दिल्ली-जयपुर हाईवे-48 सहित जिले के अन्य मार्गों पर वाहन रेंगते दिखे। 15 जनवरी के बाद मौसम साफ होने का अनुमान है। लेकिन सर्द मौसम अभी बना रहेगा।
बता दें, चार दिन पहले रेवाड़ी में 50 एमएम से ज्यादा हुई बारिश के बाद बनी नमी और पश्चिम की तरफ से चल रही ठंडी हवाओं ने ठंडक बढ़ाई है। पहाड़ों पर लगातार पड़ रही बर्फबारी से मैदानी इलाकों में और ज्यादा ठंड व कंपकंपी बढ़ी है। वीरवार को न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि शुक्रवार को 2.5 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। न्यूनतम तापमान में भले ही बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कोहरे और शीतलहर की वजह से ठंड कम होने की बजाए बढ़ी है।
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15 जनवरी के बाद मौसम साफ होने के साथ ही धूप भी खिलेगी
15 जनवरी के बाद मौसम साफ होने के साथ ही धूप भी खिलेगी लेकिन शीतलहर के कारण ठंडक बनी रहेगी। इस सीजन में अभी तक एक बार न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु पर पहुंचा है। 19 दिसंबर को न्यूनतम तापमान -1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। उसके बाद मौसम में उतार चढ़ाव बनी रही। हालांकि बारिश के बाद फिर से मौसम ठंडा हुआ है। घना कोहरा और ठिठुरन बढ़ी है, जिससे लोगों को बचने के लिए अलाव सेंकना पड़ा। कम दृश्यता भी परेशानी का सबब बनी।
फसलों के लिए वरदान साबित होगा कोहरा
विगत दिनों हुई बारिश और अब लगातार छा रहा कोहरा गेहूं और सरसों की फसल के लिए काफी फायदेमंद हैं। नांगल चौधरी से लेकर रेवाड़ी और गुरुग्राम तक दक्षिणी हरियाणा के तमाम जिलों में इस सीजन में गेहूं और सरसों की फसल होती है। अच्छी बारिश और कोहरे से किसानों को खेतों में सिंचाई करने की जरूरत नहीं है जिससे बंपर पैदावार होगी लेकिन अगर बारिश के साथ ओलावृष्टि होती है तो फसलों को नुकसान भी होगा।
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