जिले में अब 10 जीपीएस सैंपलिंग मशीन की मदद से खेत की मिट्टी की सैंपलिंग शुरू हो गई है। फिलहाल कृषि विभाग की ओर से रेवाड़ी और खोल ब्लॉक में सैटेलाइट से कनेक्टेड मशीन की मदद से जगह चिह्नित कर मिट्टी के सैंपल लिए जा रहे हैं।
सैंपल रिपोर्ट आने के बाद किसानों के सॉइल हेल्थ कार्ड बनेंगे, जिसमें उनके खेत की मिट्टी और मौजूद कमियों के बारे में बताया जाएगा।
क्या है जीपीएस सैंपलिंग मशीन का फायदा
जीपीएस सैंपलिंग मशीन सैटेलाइट से कनेक्ट होती है। इसके जरिए किसान की जमीन की सही पैमाइश करने के बाद वहां की मिट्टी का सैंपल लिया जाता है। इससे हर किसान की एक-एक इंच जमीन का जहां सही रिकॉर्ड दर्ज होगा।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ, बढ़ेगी उपज
विभाग का दावा है कि जीपीएस मशीन से मैपिंग के बाद ऐसा कोई किसान नहीं होगा। जिसके खेत के मिट्टी के नमूने नहीं लिए जाएं।
रिपोर्ट के आधार पर मिलने वाले हर किसान के सॉइल हेल्थ कार्ड में मिट्टी की विशेषता और कमी का उल्लेख होगा। साथ ही बताया जाएगा कि क्या करने पर उसके खेत की मिट्टी और ज्यादा उपजाऊ हो सकती है।
वर्जन
हाई टेक्नोलॉजी युक्त जीपीएस सैंपलिंग मशीन का उपयोग किसान और उपज के विकास के लिए किया जा रहा है। सिंचित क्षेत्र में 2.5 हेक्टेयर जमीन पर एक सैंपल लिया जाएगा। ब्लॉक वाइज मृदा परीक्षण का काम शुरू हो चुका है।
-डॉ.अजीत यादव, कृषि विकास अधिकारी, बूढ़पुर रेवाड़ी