संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। सरकारी स्कूलों के मुखिया अब आवश्यक वस्तुओं की खरीद फरोख्त जेम पोर्टल (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) के माध्यम से ही कर सकेंगे। पारदर्शिता के लिए यह व्यवस्था की गई है।
अब स्कूल के मुखिया पहले की तरह प्राइवेट दुकान पर जाकर खरीद फरोख्त नहीं कर सकेंगे। सिर्फ सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध सरकार द्वारा ऑथराइज्ड दुकानों से पोर्टल के जरिए सामान मंगाना होगा। शिक्षा विभाग के मुताबिक गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) से खरीद-बिक्री के लिए स्कूल मुखिया को पहले पोर्टल पर रजिस्टर्ड करना होगा। यहां समान का नाम लेकर सर्च करने पर यह पता चल सकेगा कि जेम पर कितने सामान उपलब्ध हैं और कितनी रेट है, जिसमें सबसे कम वालों को विभाग को खरीदने का आर्डर देना है। अगर बेचना है तो अधिक रेट होना चाहिए। जेम पोर्टल पर खरीद-बिक्री के लिए विभाग की ओर से सरकारी स्कूलों के मुखियाओं और उनके सहायकों को ट्रेनिंग दी गई है, जहां उन्हें सरकारी जेम पोर्टल पर खरीदने और कोई सामान बेचने का तरीका बताया गया है। इसके साथ ही बताया गया है कि कोई दुकानदार चूना न लगादे, इसलिए उससे बचाव के भी तमाम तरीके बताए गए हैं। वहीं, जेम की अन्य सेटिंग्स के बारे में भी मुखियाओं और उनके सहायकों को बताया गया है।
इस तरह से बेच पाएंगे प्रोडक्ट
इस पर शहर से लेकर गांव के बिजनेसमैन बहुत ही आसानी से अपने प्रोडक्ट को रजिस्टर्ड करा सकते हैं। जेम पर जाकर जीएसटी नंबर, पैन नंबर, बैंक, अकाउंट नंबर एवं आधार नंबर अंकित कर और रजिस्टर्ड कर अपना प्रोडक्ट बेच सकते हैं। जेम पोर्टल यह भी राय देगा कि कौन समान सस्ता एवं बेहतर है। जेम पोर्टल पर डिमांड डालते ही क्रेता-विक्रेता आवेदन कर देंगे, जो सस्ता बेचेगा या खरीदेगा, मुखियाओं को अब उनसे ही खरीद-बिक्री करनी पड़ेगा। पोर्टल पर सब ओपन होगा, कोई भी दुकानदार या ग्राहक अपना नियमानुसार रजिस्ट्रेशन कर विभाग के साथ खरीद-बिक्री कर सकता है। इस योजना से सिस्टम में पारदर्शिता आएगी। सरकारी पोर्टल (जेम) पर निदेशालय (विभाग) पूरी तरह पेनी नजर रखेगा, ताकि मुखियाओं या स्कूल के खरीदने वाले संबंधित कर्मचारी या अधिकारी की तरफ से कोई किसी प्रकार की गड़बड़ी न की जाए।
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खरीद फरोख्त के लिए जैम पोर्टल का उपयोग स्कूल मुखियाओं को करना होगा। पोर्टल से पारदर्शिता आएगी।
कपिल पूनिया, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी।