नियम 134 ए के तहत निजी स्कूलों में दस फीसदी सीटों पर बीपीएल एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के प्रवेश की प्रक्रिया शिक्षा विभाग एवं सरकार के लिए मुसीबत बन गई है। प्राइवेट स्कूलों की ओर से मेधावी सूची में आए बच्चों को एडमिशन नहीं देने से अभिभावकों को स्कूल एवं शिक्षा विभाग के यहां की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
अभिभावकों की परेशानी पर संज्ञान लेते हुए बुधवार को डीईओ धर्मबीर बल्डोदिया ने बच्चों के एडमिशन करने को कहा। उन्होंने प्राइवेट स्कूलों को चेतावनी दी कि सभी कागजात पूरा करने के बावजूद जो स्कूल नियम के तहत बच्चों को एडमिशन नहीं दे रहे हैं, उनकी मान्यता रद्द करने के लिखा जाएगा।
गौरतलब है कि नियम के तहत जिले में मेधावी सूची में आए पचास फीसदी बच्चों का एडमिशन अभी तक नहीं हो पाया है। चूंकि अब गर्मी की छुट्टियां होने में सप्ताह से कम का समय रह गया है, इसलिए अभिभावक बच्चों के प्रवेश को मानसिक तनाव में आ रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि प्राइवेट स्कूल जान-बूझकर उन्हें परेशान कर रहे हैं ताकि गर्मी की छुट्टियां पड़ जाएं।
बहकावे में आए बगैर कार्यालय को दें शिकायत, तुरंत होगी कार्रवाई
उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को शिकायत देने के बाद डीईओ कार्यालय डीईओ धर्मबीर बल्डोदिया ने परिजनों को नसीहत देते हुए कहा कि आप परेशान न हो कोई भी बच्चा बिना एडमिशन के नहीं रहने दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आप किसी के बहकावे में न आएं,कोई भी शिकायत होने पर सीधे उनसे मिले। उन्होंने कहा कि आप स्कूल संबधी प्रवेश के सभी कागजात पूरे कर स्कूल पहुंचे,बावजूद इसके यदि कोई दिक्कत है तो स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। इधर डीईओ कार्यालय में बैठे खंड रेवाड़ी शिक्षा अधिकारी सुभाष चंद्र ने मौके पर ही एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल को हड़काते हुए कहा कि या तो बच्चों को एडमिशन दे दो अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहो। उधर प्रिंसिपल ने कहा कि सर चेयरमेन के आदेश हैं।
डीईओ साहब एफिडेविट मांग रहे हैं स्कूल
बुधवार को एक ही स्कूल की शिकायत लेकर डीईओ कार्यालय पहुंचे अभिभावक दिनेश, सुंदर सैनी, रमेश कुमार, सुरेश एवं नर्मदा सहित अन्य ने कहा कि वह पिछले पांच मई को रिजल्ट घोषित होने के बाद से दिल्ली रोड स्थित एक स्कूल के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन यहां पर स्कूल द्वारा एक गरीबी रेखा का एफिडेविट भरवाया जा रहा है। जो कि गलत है। एफिडेविट में लिखा गया है कि यदि जांच के बाद बीपीएल या आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावक नहीं पाया गया तो पूरी फीस वसूल की जाएगी। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल बे-वजह उनके बच्चों को परेशान किया जा रहा है।
महज 479 विद्यार्थी ही मेधावी सूची में आ पाए
जिले के सभी पांच ब्लॉकों में 1289 विद्यार्थियों ने निजी स्कूल में प्रवेश के लिए मेधावी टेस्ट दिया था। जिनमें से महज 479 विद्यार्थी ही इस सूची में स्थान बना पाए थे। रेवाड़ी ब्लॉक में 895 बच्चों में से सर्वाधिक 273 बच्चे मेधावी सूची में आए थे। रेवाड़ी बीईओ सुभाष चंद्र ने कहा कि उनके यहां पर पचास फीसदी से अधिक बच्चों का एडमिशन स्कूलों में हो चुका है। उन्होंने कहा कि बच्चे हुए बच्चों के एडमिशन की प्रक्रिया भी चल रही है। किसी बच्चे के एडमिशन में आने वाली दिक्त को दूर कर बच्चों को प्रवेश दिलाया जाएगा। खंड जाटुसाना में 48, खोल में 24, बावल में 31 एवं नाहड़ में 109 विद्यार्थी मेधावी सूची में आए थे।
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वर्जन-
अभिभावक एडमिशन संबधी सभी कागजात पूरे कर स्कूल में जाएं। इसके बाद भी यदि कोई एडमिशन देने में आनाकानी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक-एक बच्चे के एडमिशन के लिए शिक्षा विभाग प्रयासरत है।
-धर्मबीर बल्डोदिया, डीईओ, रेवाड़ी