प्रदेश में मातृ एवं शिशु मृत्युदर पर लगाम लगाने के लिए सोमवार से स्वास्थय विभाग की ओर से प्रदेश के सबसे प्रभावित चार जिलों के साथ रेवाड़ी के खोल ब्लॉक में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर सलामती प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया जाएगा। प्रोजेक्ट के माध्यम से बच्चों में हेल्दी अंतर रखने के लिए तीन माह के लिए इंजेक्टेबल कॉन्ट्रासेप्टिव(महिलाओं को गर्भ निरोधक इंजेक्शन) का प्रयोग किया जाएगा।
अर्थात परिवार नियोजन के लिए प्रदेश में पहली बार सरकारी स्तर पर मुफ्त में इंजेक्शन लगेगा। प्राइवेट अस्पतालों में इंजेक्शन लगने की वैसे कीमत 500 रुपये है।गौरतलब है कि सलामती प्रोजेक्ट पाथ फाइंडर इंटनेशनल संस्था की ओर से आयोजित किया जा रहा है। फिलहाल रेवाड़ी के अलावा पलवल, मेवात और फरीदाबाद के गिने-चुने ब्लॉकों में प्रोजेक्ट सलामती की शुरूआत होगी।
वहीं सरकार यदि प्रोजेक्ट को एक साल में सफल पाती है तो संस्था से टेकओवर कर स्वयं प्रदेश भर में इसे अपनाएगी। खोल हेल्थ सेंटर पर सुबह साढ़े नौ बजे डीसी डॉ. यश गर्ग प्रोजेक्ट का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर पाथ फाइंडर इंटरनेशनल संस्था की ओर से सलामती प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर इजाजाजुद्दीन, सीएमओ पुृष्पा बिश्नोई, एसएमओ विजयपाल एवं अन्य स्टॉफ उपस्थित रहेगा।
तीन महीने होगी एक इंजेक्शन की मियाद
परिवार कल्याण अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन सर्वजीत थापर ने बताया कि 5 सौ रुपये कीमत का जो इंजेक्शन अब मुफ्त में सरकार द्वारा फिलहाल गिने चुने ब्लॉकों में लगेगा उसकी मियाद तीन महीने होगी। मतलब एक बार इंजेक्शन लगाने के बाद तीन महीने तक गर्भ धारण नहीं होगा। ऐसे में साल भर गर्भ से मुक्ति पाने के लिए साल में चार इंजेक्शन लगेंगे।
एक इंजेक्शन से गर्भ निरोधन की मियाद तीन महीने तक होगी।
अन्य ब्लॉक की महिलाओं को भी मिलेगा लाभ
रेवाड़ी के खोल ब्लॉक के अलावा जिन अन्य जिलों में प्रोजेक्ट सोमवार से शुरू होगा, उनमें पलवल के चार ब्लॉक, मेवात के तीन ब्लॉक, फरीदाबाद का एक एरिया होगा। लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ इन्हीं ब्लॉक में रहने वाली महिलाओं को सलामती प्रोजेक्ट का लाभ मिलेगा। अन्य ब्लॉक की महिलाएं भी यहां जाकर इस प्रोजेक्ट का लाभ ले सकती हैं।
गर्भ में सही अंतर नहीं होने से बढ़ती है मातृ एवं शिशु मृत्युदर
गर्भधारण एवं बच्चे के जन्म के 42 दिन के अंदर यदि महिला की मौत हो जाती है तो वह मैटरनल डैथ मेें गिनी जाती है। वहीं बच्चे के जन्म के एक साल के अंदर यदि बच्चे की मौत हो जाती है जो वह इनफैंट डैथ अर्थात शिशु मृत्यु में गिनी जाती है। उन्होंने बताया कि मेवात, पलवल, फरीदाबाद एवं रेवाड़ी में मैटरनल एवं इनफैंट डैथ के के केस प्रदेश की तुलना में ज्यादा हैं।
तीन जिलों में मातृ-शिशु मृत्यु दर का अनुपात काफी ज्यादा है। इसलिये ही इन जिलों से प्रोजेक्ट सलामती की शुरुआत की जा रही है। साल भर की मॉनीटरिंग के बाद व्यापक स्तर पर प्रोजेक्ट को शुरू किया जाएगा।
-डॉ.सर्वजीत थापर, परिवार कल्याण अधिकारी, जिला रेवाड़ी