रेवाड़ी। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई सूचना तय समय में नहीं देने के मामले में हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने धारूहेड़ा के दो तत्कालीन बीडीपीओ वीरेंद्र पर 12500 और विशाल भारद्वाज पर 12500 रुपये यानी कुल 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने पाया कि दोनों अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान निर्धारित 30 दिन की वैधानिक समय सीमा में आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराने में विफल रहे। करीब छह साल बाद उसके हस्तक्षेप के पश्चात आवेदक को जानकारी मिल सकी।
यह मामला गांव डूंगरवास निवासी चंद्र प्रकाश की ओर से 11 फरवरी 2020 को दायर आरटीआई आवेदन से संबंधित है। निर्धारित समय में जानकारी नहीं मिलने पर मामला दूसरी अपील के रूप में राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा।
आयोग ने 8 अप्रैल 2021 को संबंधित एसपीआईओ को पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होने पर आयोग ने 2 जनवरी 2024 को संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। आयोग के अनुसार इस नोटिस का जवाब भी दाखिल नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान आवेदक चंद्र प्रकाश ने ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखा। उन्होंने आयोग को बताया कि उन्हें जानकारी मिल चुकी है, लेकिन वह अधूरी है। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
दूसरी ओर सरपंच विपिन कुमार और ग्राम सचिव दिनेश कुमार ने आयोग को बताया कि 21 अगस्त 2026 के अंतरिम आदेश के अनुपालन में आवेदक ने 2 सितंबर 2026 को संबंधित रिकॉर्ड का निरीक्षण किया था और जानकारी प्राप्त की थी। उन्होंने आयोग से मामले को बंद करने का अनुरोध किया।
आयोग ने रिकॉर्ड की जांच और अधिकारियों के कार्यकाल से संबंधित तथ्यों के आधार पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया। रिकॉर्ड के अनुसार, वीरेंद्र का कार्यकाल 15 नवंबर 2019 से 16 अप्रैल 2020 तक रहा, जबकि विशाल भारद्वाज 17 अप्रैल 2020 से 9 नवंबर 2020 तक इस पद पर रहे।
आयोग ने माना कि दोनों अधिकारी अपने-अपने कार्यकाल में निर्धारित समय के भीतर सूचना उपलब्ध कराने में विफल रहे। देरी के संबंध में भी कोई ठोस और कानूनी रूप से मान्य कारण प्रस्तुत नहीं किया गया।
आयोग ने अपने आदेश में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) का उल्लेख किया। इसके तहत निर्धारित अवधि में सूचना उपलब्ध नहीं कराने और देरी के लिए उचित कारण प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधित जन सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाया जा सकता है। आदेश में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रमेश शर्मा एवं अन्य बनाम राज्य सूचना आयोग, हरियाणा एवं अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है।
तीन महीने में जमा करानी होगी जुर्माने की राशि
आयोग ने निर्देश दिए हैं कि दोनों अधिकारियों पर लगाया गया जुर्माना आदेश प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर निर्धारित सरकारी मद में जमा कराया जाए। आदेश की प्रति विकास एवं पंचायत विभाग चंडीगढ़ के निदेशक को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। निदेशक संबंधित अधिकारियों से जुर्माने की राशि की वसूली सुनिश्चित करेंगे। यदि संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुका है, तो कानून के अनुसार राशि उसकी पेंशन से वसूल की जाएगी। आयोग ने विभाग को भविष्य में आरटीआई आवेदनों का निर्धारित समय सीमा में निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, इस मामले में हुई देरी के कारणों की जांच करने को कहा है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ विभागीय सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करनी होगी। इस कार्रवाई और जांच की जानकारी प्राथमिकता के आधार पर तीन महीने के भीतर आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।