रेवाड़ी। शहर के रोडवेज डिपो में लंबे समय से स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने से वर्तमान में बसें अस्थायी (अप्रेंटिस) कर्मचारियों के भरोसे ही दौड़ रही हैं। कार्यशाला में वर्तमान में विभिन्न पदों पर 75 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं तथा 60 अस्थायी कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। नियमित कर्मचारियों की कमी के कारण कार्यशाला में मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहा है। बसें खराब होने पर ठीक होने में तीन से चार दिन लग जाते हैं।
बता दें कि डिपो में वर्ष 1987 के बाद से स्थार्यी भर्ती नहीं हुई है। इसके अलावा जो थे उनमें भी अधिकांश सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे यहां के हालात ज्यादा ठीक नहीं है। फिलहाल यहां 133 बसें हैं, जिसमें से प्रतिदिन दस फीसदी बसें कार्यशाला में सर्विस के लिए खड़ी रहती हैं। किसी दिन इनकी संख्या बढ़ भी जाती है। कर्मचारियों की कमी के कारण कार्यशाला में कार्य प्रभावित हो रहा है। रोडवेज कार्यशाला में मैकेनिक के 38 पद स्वीकृत हैं, जिन पर 15 कर्मचारी ही कार्यरत है। वहीं 23 पद खाली पड़े हुए हैं। कारपेंटर व ब्लैक स्मिथ के भी दस-दस पद स्वीकृत हैं, जिसमें कारपेंटर के तीन तथा ब्लैक स्मिथ का एक ही कर्मचारी कार्यरत है। 14 मैकेनिक दिन में तथा एक मैकेनिक रात में ड्यूटी दे रहा है। नियमित कर्मचारियों की भर्ती नहीं होने के कारण कार्यशाला में वर्तमान में 177 में से 102 पद खाली पड़े हुए हैं। हालांकि चतुर्थ श्रेणी की भर्ती के दौरान डिपो को 23 कर्मचारी मिलने से थोड़ी राहत जरूर मिली है।
मुख्यालय को कार्यशाला में रिक्त पदों को लेकर सूचना भेजी हुई है। प्रयास मौजूदा कर्मचारियों से ही बेहतर सेवाएं देने का है। अप्रेंटिस करने वाले कर्मचारी भी बेहतर कार्य कर रहे हैं।
-अशोक कौशिक, महाप्रबंधक रोडवेज