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श्रम नीतियों के खिलाफ गरजे कर्मचारी

Thu, 03 Sep 2015 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
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रोडवेज, नगर परिषद, ट्रेड यूनियन, सीटू, महिला स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, शिक्षा विभाग, जनस्वास्थ विभाग, पीडब्लूडी, बिजली निगम के कर्मचारियों ने बुधवार को केंद्र की श्रम नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया ।
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इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। कर्मचारियों की ये हड़ताल सुबह नौ से शाम पांच बजे तक रही। इससे यात्रियों और अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि शाम पांच बजे हड़ताल खत्म होने के बाद सब कुछ सामान्य हो गया।

रोजाना 35, बुधवार को नौ बजे से पहले 55 बसें हुईं रवाना
रेवाड़ी। देशव्यापी हड़ताल के आह्वान के बावजूद रोडवेज डिपो पर चक्का आधा ही जाम हुआ। हड़ताल वैसे तो सुबह चार बजे से रात बारह बजे तक होनी थी। इस वजह से पुलिस बल भी सुबह से ही रोडवेज वर्कशॉप और डिपो में तैनात हो गया था।
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दूसरे खेमे ने अन्य संघों के साथ मिलकर सुबह नौ बजे से पांच बजे तक हड़ताल रखी। जबकि इससे पहले सुबह नौ बजे तक वीडियोग्राफी के बीच 55 बसें डिपो से रवाना की जा चुकी थीं, जबकि नौ बजे तक करीब 35 बसें ही रवाना होती हैं। उधर सुबह चार बजे से हड़ताल की घोषणा करने वाले संघ के पदाधिकारी सड़क किनारे धरने पर ही बैठे रहे।

-सवारी बैठा रहीं निजी बसों की निकाली हवा
नौ बजे के बाद सभी संघ एक हुए और हड़ताल और प्रदर्शन के दौरान तनातनी भी हुई। रोडवेज बसों को सवारियां न बैठाते देख निजी बसें डिपो के आगे जमा हो गईं। इस पर प्रदर्शनकारियों रोडवेज कर्मियों ने निजी बसों को रुकवाकर सवारियों को उतरवा दिया।

वहीं निजी बसों के साथ ही रोडवेज डिपो की बसों के पहियों की भी आधी हवा निकाल दी। तनातनी और माहौल गर्म होता देख अतिरिक्त पुलिस फोर्स बुलाई गई। मौके पर पहुंचे डीएसपी वीरेंद्र सैनी ने अंबेडकर और बावल चौक पर बैरियर लगवाकर निजी बसों को डिपो रोड पर न आने देने के आदेश दिए। जिसके बाद हड़ताल शांतिपूर्ण तरीके से चली।

डिपो कर्मियों की क्या थी मुख्य मांगें
1. हड़ताल पर मौजूद डिपो कर्मियों की मुख्य मांगों में पहली मांग निजी बसों का परमिट बंद करने के साथ ही पीपीपी मॉडल को भी बदलने का था। कर्मचारियों ने बताया कि इस मॉडल के तहत सरकार निजी बस, निजी बस चालक और सरकारी कंडक्टर रखना चाहती है, इससे रोडवेज पूरी तरह निजीकरण की ओर बढ़ जाएगा। बस संचालकों को प्रति किलोमीटर के हिसाब से तय राशि दी जाएगी। इससे कंडक्टर से मिलीभगत के बाद निजी बसें आम आदमी को बैठाने के लिए विवश नहीं होंगी। वहीं सरकारी खजाना भी खाली ही होगा।
2. 2003 के बाद भर्ती चालक परिचालकों को तत्कालीन सरकार ने नियुक्ति तिथि के हिसाब से वेतन तो दे दिया। लेकिन अन्य मिलने वाले फायदे जैसे छुट्टी, वर्दी, कई भत्तों से वंचित रखा। जो गलत है।
3. पंजाब के समान वेतन देने का वादा करने के बावजूद अभी तक उसे लागू नहीं किया।
4. सरकार रोड सेफ्टी एक्ट लाने की तैयारी में है। इस एक्ट में एक्सीडेंट होने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। कई बार छोटे वाहन खुद की गलती से हादसे का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में निर्दोष चालकों को भी सजा भुगतनी होगी। सरकार अभी तक लागू मोटर व्हीकल एक्ट ही कायम रखे।

करीब 6 लाख का रिवेन्यू हुआ प्रभावित
रोडवेज बस डिपो में रोजाना ऑन रोड रहने वाली बसों से औसतन 11 लाख का रिवेन्यू आता है। त्योहार का सीजन होने के कारण फिलहाल यह औसत पिछले पांच दिनों में 15 लाख रुपये के करीब था। अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को शुभ काम में संकोच के चलते सवारियों पर असर पड़ता है। फिर भी करीब 6 लाख रुपये के आसपास का रिवेन्यू प्रभावित हुआ है।
पिछले चार दिनों का क्या रहा रिवेन्यू
29 अगस्त- 14.63 लाख रुपये
30 अगस्त- 14.80 लाख रुपये
31 अगस्त- 16.50 लाख रुपये
01 सितंबर- 14.63 लाख रुपये
02 सितंबर-  06.00 लाख रुपये    
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ये संघ और कर्मी थे हड़ताल पर
ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन संबंधित महासंघ, हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ, रोडवेज कर्मचारी यूनियन, सर्व कर्मचारी संघ, इंटक के अधिकारियों कर्मचारियों दलबीर नेहरा, अनूप सेहराव, सरबत पूनिया के अलावा देवेंद्र तिवाड़ी, कैलाश चंद, राजेंद्र टीकला, सतेंद्र यादव, मामराज, रामपाल, धर्मबीर, विशंबर दयाल सेठी, राजवीर फोगाट, बीर सिंह, संदीप कुमार, नरेंद्र सिंह, जयप्रकाश, मोहनलाल, अमर सिंह, रवि कुमार, ओमप्रकाश उर्फ पप्पू, विद्यासागर समेत सैकड़ों की संख्या में रोडवेज कर्मचारी हड़ताल पर रहे।
वर्जन
बसों का अधिक से अधिक संचालन हो सके, इसके लिए रात में प्लानिंग करने के साथ सुबह तीन बजे से ही योजना को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया था। इसी कारण अधिक से अधिक बसों को रवाना किया गया, जिससे सवारियों को कम से कम परेशानी हो।
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-महिपाल सिंह, जीएम, रेवाड़ी रोडवेज बस डिपो
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