कुछ दिनों की राहत के बाद सर्दी व कोहरे ने जिले को एक फिर अपनी चपेट में ले लिया है, लेकिन रोडवेज की ओर से दुर्घटनाओं पर रोकथाम के लिए स्थानीय रूटों वाली बसों में फॉग लाइटें नहीं लगवाई गई है। हालांकि लंबे रूटों की बसों में यह समस्या नहीं है। कोहरे के कारण सड़कों पर धुंध के कारण दृश्यता बहुत कम हो रही है, जिससे कारण हादसों की संभावनाएं बनी रहती है। रोडवेज की बसों पर फॉग लाइट नहीं लगाया जाना विभाग की लापरवाही को दर्शाता है।
जोखिम भरा रहता है यात्रियों का सफर
रेवाड़ी डिपो में 132 बसें हैं जिनमें लंबे रूटों को छोड़कर लोकल रूटों की बसों में अभी तक फॉग लाइट नहीं लगी है। लोकल रूटों की बसें बिना फॉग लाइटों के ही दौड़ रही है। इसके चलते कोहरे में यात्रियों की जान जोखिम में रहती है। इसके चलते रोडवेज की बसों में हर रोज सैकड़ों लोग अपनी जान को संकट में डालकर यात्रा कर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि कोहरे के मौसम में रोडवेज की बसों पर अभी तक फॉग लाइटें नहीं लग पाई है। फॉग लाइटों के अभाव में अक्सर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। चालकों व परिचालकों ने फॉग लाइटों का बंदोबस्त नहीं होने का ठीकरा सरकार के जिम्मे फोड़ा है।
पूरे मामले में रोडवेज की लापरवाही पर सवाल उठ गए हैं। सड़क सुरक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि सर्दी की शुरूआत होते ही हरियाणा की सड़कों पर कोहरा छाने लगता है। इससे सड़कों पर दृश्यता बेहद कम हो जाती है। इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा हरियाणा रोडवेज की बसें में फॉग लाइट लगाने की तैयारी नहीं की गई। यह रोडवेज की बड़ी लापरवाही है और यात्रियों की जान से खिलवाड़ है। डिपो में इस समय करीब 132 बसें हैं और इनमें से करीब 110 बसें रोजाना सड़कों पर चलती हैं। बाकी बसें या तो खराब हैैं या फिर कंडम घोषित हो चुकी हैैं। जिले में हर साल कोहरे के दिनों में दर्जनों हादसे होते हैं। रोडवेज विभाग ने कोहरे के कारण होने वाले हादसों से बचने के लिए पहले से कोई तैयारी नहीं की है।
हमने लंबे रूटों की बसों में फॉग लाइटें लगवा रखी है और लोकल रूटों की बसों में फॉग लाइटें जल्द ही लगवा दी जाएगी। अधिकांश बसों में लगवाई जा चुकी है, जिनमें नहीं है उनकी जांच कराने के बाद लगवा दी जाएगी।
- नवीन भारद्वाज, महाप्रबंधक।