मानसूनी सीजन की बारिश ने शहर भर में सड़कों की स्थिति और सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता को सामने ला दिया है। शहर की कॉलोनियों से लेकर स्टेट हाइवे की सड़कों तक में बने गड्ढे, जलभराव आदि खामियां प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रही हैं। पीडब्लूडी (बीआर), नगर परिषद व हुडा तीनों विभागों की ओर से बनाई गई सड़कों की हालत बद से बदतर हो चली है।
चार दिन पूर्व हुई बरसात में शहर की एक भी सड़क ऐसी नहीं थी, जहां जलभराव नहीं हुआ हो। चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त विभागों की ओर से सड़क निर्माण कार्य में करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी सड़कों की खस्ताहालत है।
शहर की प्रमुख सड़कों का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के पास है।
सिटी से लगभग 12 सड़कें दूसरे क्षेत्र व गांवों की ओर जाती हैं। इनमें भाड़ावास रोड, बावल रोड, नारनौल रोड, गढ़ी-बोलनी रोड, दिल्ली रोड, महेंद्रगढ़ रोड, बरेली रोड शामिल है। इन सभी सड़कों की स्थिति कुछ ज्यादा ठीक नहीं है। एक-दो सड़कों को छोड़कर अन्य सड़कें टूटी-फूटी हैं। विभाग की ओर से प्रत्येक सड़क निर्माण कार्य में कई करोड़ की राशि खर्च की गई है, लेकिन सड़कों की हालत से यह बात कुछ कम ही हजम होती है। हालांकि विभाग के अधिकारी सड़कों की समयानुसार मरम्मत करने का हवाला देते हैं। वहीं सड़क टूटने का कारण ड्रेनेज सिस्टम का अभाव बताते हैं।
साढ़े चार करोड़ से बना बावल रोड बदहाल
पीडब्यूलडी की ओर से बावल चौक से बनीपुर चौक तक की 11 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई थी। आज बनाई गई सड़कों में सबसे बदहाल स्थिति बावल रोड की है। बावल चौक में घुसते ही सड़क में गड्ढे दिखने लग जाते हैं। हालांकि विभाग ने कई बार इस सड़क की मरम्मत भी करवाई, लेकिन चंद महीनों में ही फिर से सड़क टूट गई।
घोटालों की भेंट चढ़ गई नगर परिषद की सड़कें
नगर परिषद प्रशासन की ओर से शहरभर में सड़क निर्माण कार्य में काफी पैसा खर्च किया जा चुका है। लेकिन जमीनी स्तर पर इस खर्च का असर दिखाई नहीं देता। शहर की हरेक कॉलोनी में सड़कें खराब व टूटी-फूटी हैं। सड़क निर्माण को लेकर गत वर्ष नप का बड़ा गड़बड़झाला भी सामने आया था। फर्जी बिल व अन्य घोटालों का पर्दाफाश हुआ था। ऐसे में सड़कों का निर्माण बढ़िया सामग्री से कैसे हो सकता है। वहीं वर्ष 2016 में नप ने सड़क मरम्मत व निर्माण पर लगभग 50 लाख से अधिक पैसा खर्च किया है, लेकिन सड़कें कुछ और ही बोलती हैं।
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वर्जन:
मानसून से पूर्व हम कई सड़कों का मरम्मत कार्य पूरा कर चुके थे। बावल रोड पर भी गड्ढे भरवा दिए गए हैं। असल में पानी की निकासी नहीं होने के चलते सड़क खराब हो रही है। वहीं बारिश समाप्त होते ही सड़क की स्थाई रूप से मरम्मत करवाई जाएगी।
अश्वनी कुमार, एसडीओ, लोक निर्माण विभाग
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नगर परिषद के प्रत्येक वार्ड में सड़कों पर विशेष ध्यान दिया गया है। कॉलोनियों में लगभग सड़कें अच्छी हालत में है, वहीं शिकायत मिलने पर तुरंत प्रभाव से सड़क को सही करवाया जाता है।
मनोज कुमार, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
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सर्कुलर रोड का काम अभी ढ़ंग से पूरा भी नहीं हुआ था कि सड़क में गड्ढ़े बनने शुरू हो गए। बीएमजी मॉल के सामने सड़क टूटने लगी हैं।
घनश्याम सैनी, सर्कुलर रोड
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बरसाती मौसम में शहर की सड़कों पर चलना किसी खतरे से कम नहीं है। सड़कों पर जलभराव इतना होता है कि न होते हुए भी कोई हादसा हो जाए।
जोगिंद्र सिंह, सेक्टर पांच
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नगर परिषद की ओर से कभी भी समय पर सड़कों की मरम्मत नहीं कराई जाती। विभाग अधिकारियों को खूब शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं है।
अनिल कुमार, बीएमजी मॉल के सामने
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बावल रोड का सबसे बुरा हाल है। यहां काफी संख्या में सवारियां मौजूद होती है। लोगों को सड़क से गुजरने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
अभिषेक झाम, प्रधान, शिव चौक ट्रेडर्स एसोसिएशन