जब घर ही गंदा है तो आंगन की चिंता किसे। ऐसा ही हाल रेवाड़ी नगर परिषद और प्रशासन का है। परिषद में आलम यह है कि पानी की टंकी खुली पड़ी है और उसमें कीड़े कुलबुला रहे हैं।
टंकी में जमी काई साफ कहानी बयां कर रही है कि सफाई न जाने कब हुई थी। वहीं लघु सचिवालय में भी पानी सप्लाई के लिए रखी कई टंकियां खुली हैं और मच्छरों से युक्त गंदे पानी से भरी हैं।
ऐसे में साफ है कि रोजाना हजारों लोगों की यहां आवाजाही होती है और आने वाले लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। अधिकारियों को इसकी कोई चिंता नहीं है।
अधिकारियों के लिए आरओ का पानी
दोनों ही जगहों पर जहां आम आदमी के लिए गंदगी से भरी टंकियों से पानी सप्लाई होता है वहीं अधिकारियों के लिए साफ-स्वच्छ पानी की व्यवस्था है। लघु सचिवालय हो या फिर नगर परिषद अधिकारियों के पीने के लिए आरओ और वाटर प्यूरिफायर लगे हुए हैं या फिर कैंपर सप्लाई आ रही है। इससे स्पष्ट है कि अधिकारियों को इस समस्या के बारे में जानकारी ही नहीं है। पानी की टंकियों की सफाई रोजाना होती है।
मच्छर पनप रहे हैं खुली टंकियों में
लघु सचिवालय की छत पर करीब दर्जन भर टंकियां हैं। इनसे सचिवालय में पानी की सप्लाई होती है। इस टंकियों में से आधी के तो ढक्कन गायब हैं या फिर टूटे हुए हैं। ऐसे में धूल और कूड़ा तो पानी में गिरता ही है वहीं टंकियों में मच्छर भी पनपते हैं। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
कई कार्यालयों में आते हैं कैंपर
लघु सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों जैसे उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त, एसपी, एसडीएम, सीटीएम समेत कई उच्चाधिकारियों के लिए कार्यालय में ही आरओ लगा है। वहीं कई अन्य अधिकारियों के लिए पीने के पानी की सप्लाई कैंपर के जरिए होती है। कर्मचारियों और फरियादियों के लिए जो वाटर कूलर लगे हैं, वह या तो ठीक से काम नहीं कर रहे हैं या फिर टंकियों में भरा पानी इतना गंदा है कि मामूली रूप से शुद्धिकरण के बावजूद पानी पीने लायक नहीं होता है।
कोट्स
टंकियों में भरा पानी अगर साफ नहीं है तो इससे पेट संबंधी काफी बीमारी होने की संभावना है। इसके अलावा शरीर पर लाल रंग के चकते और खुजली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। - डा. मनोज कुमार, चर्मरोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल