देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए 1984 के दंगों में रेवाड़ी से भी सिख समुदाय के लोग मारे गए थे। इन लोगों के परिजनों के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए मुआवजा देने के लिए सरकार ने जब प्रक्रिया शुरू की तो अब उनके सामने सरकारी शर्त आड़े आ रही है।
सरकार ने सबूत के तौर पर ऐसे दस्तावेज मांगे हैं, जिनमें मृतकों के साथ उनका नाम जुड़ा हो। ऐसे में उनके परिजनों को तीस साल पुराने दस्तावेज जुटाने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
रेवाड़ी के 32 लोग इस दंगे में मारे गए थे और उनके परिवार के 72 लोगों में सरकार की ओर से एक करोड़ 60 लाख रुपये बांटा जाना है। रेवाड़ी ट्रेजरी में यह राशि आ भी चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कुछ लोग आए भी थे लेकिन उनसे कागजात पेश करने को कहा है।
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अब तक आए महज 5नाम , उनपर भी आपत्ति
भाजपा सरकार ने दंगा पीड़ितों की कागजी कार्रवाई कर जिला प्रशासन को भेज दी है। जिन 72 लोगों को यह मुआवजा मिलना है, उनके नाम की सूची भी प्रशासन के पास है। सबूत मांगने पर परिजन अब पुराने दस्तावेजों को खंगाल रहे हैं। खास बात यह है कि सरकार की इस शर्त की वजह से अभी तक प्रशासन के पास चार-पांच लोग ही मुआवजे के लिए दावा कर पाए हैं। इनके आवेदन पर भी आपत्ति लगा दी गई है। बताया गया है कि इनके नाम दो-दो बार राशि दर्ज कर दी गई है। यानि रेवाड़ी में अभी तक एक भी व्यक्ति मुआवजे की राशि नहीं ले पाया है।
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इन्हें मिलेगा मुआवजा
मुआवजा माता-पिता, बेटा-बेटी, ये नहीं हैं तो भाई के बेटे और बेटी आदि को दिया जाएगा। रेवाड़ी में जो परिजनों की सूची भेजी गई है, उनमें ज्यादातर पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, मुंबई, गुजरात आदि जगह चले गए हैं।
इन डाक्युमेंट का लगाना अनिवार्य
मृतकों से संबंध होने के सबूतों के साथ आईडी कॉर्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड आदि भी आवेदन के साथ लगाना अनिवार्य है।
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ये मारे गए थे दंगों में
गुलाब सिंह, करतार सिंह, धानी बाई, भवन सिंह, कृष्णा देवी, मनोहर सिंह, चंचल सिंह, सुंदर सिंह, इंदर सिंह, तारावंती, वीना, गुरदयाल, जमुना बाई, अर्जुन सिंह, प्रितम कौर, जसबीर सिंह सतबीर सिंह, गुरचरण सिंह, ग्यान सिंह, सुनीता देवी, जसबीर कौर, महेंद्र सिंह, जोगेंद्र कौर, सरदार सिंह, हरभजन सिंह, दयावंती, धानसिंह, मीराबाई, सुरजीत कौर, गुरचरण सिंह, अमृत कौर और तख्त सिंह के नाम शामिल है।
नुकसान का नहीं मिला मुआवजा
मॉडल टाउन में रहने गुरमुख सिंह का कहना है कि 1984 में उनके पिता राजसिंह की दुकान को भी आग लगा दी गई थी। वे परिवार सहित एक साल पंजाब में रहे लेकिन वहां रोजगार नहीं मिला तो वापस लौटे। उन्होंने नुकसान की मांग सरकार से की थी लेकिन आज तक कुछ नहीं मिला। उनका कहना है कि उस वक्त हौद चिल्हड़ में घरों को आग लगा दी थी। इस हादसे में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
वर्जन..
सरकार से मृतकों और उनके परिजनों के नामों की सूची आ चुकी है। सूचना भी भेजी गई, लेकिन अभी कुछ ही लोग आए हैं। जो भी सबूत देगा, वह मुआवजे की रकम ले जा सकता है।
-कैप्टन मनोज कुमार, एसडीएम
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उधर, दंगा पीड़ित अमर सिंह का जिंदा होने का संघर्ष जारी
उधर अमर सिंह पिछले दो दशक से अपने जिंदा होने का सबूत देकर न्याय के लिए भटक रहा है। नई बस्ती निवासी अमर सिंह और उसकी पत्नी को 84 के दंगों के समय उनके परिवार के ही कुछ लोगों ने मृत दिखा मुआवजे की रकम हड़प ली थी। इस बात का पता लगने के बाद से अमर सिंह अपने जिंदा होने का सबूत और दंगा पीड़ितों के मुआवजे की रकम हड़पने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर पीएम ऑफिस से लेकर दिल्ली और हरियाणा सीएम ने भी न्याय की गुहार लगा चुके हैं। हालांकि अब कहीं जाकर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार कुछ संजीदा हुई है। उसने बताया कि दिल्ली सरकार ने जहां मुआवजे की रकम हड़पने वालों को गिरफ्तार करने के आदेश पुलिस प्रशासन को दिए हैं। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय से भी राज्य सरकार को अमर सिंह के मामले की जांच करने के लिए कहा गया है। जिसके बाद मामला जिला प्रशासन के पास भेज दिया गया है।
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