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Rewari News: बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों पर सेवा का अधिकार आयोग सख्त, अधिकारियों से मांगा जवाब

Sat, 21 Feb 2026 11:20 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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झज्जर रोड पर लगी स्ट्रीट लाइटें। स्रोत : शिकायतकर्ता
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रेवाड़ी। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने रेवाड़ी की सड़कों पर पिछले 13-14 वर्षों से बंद स्ट्रीट लाइटों के मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए लोक निर्माण विभाग (विद्युत शाखा) और नगर परिषद रेवाड़ी के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आयोग ने इसे सार्वजनिक धन की बर्बादी का मामला करार दिया है।
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शिकायतकर्ता विवेक भाटोटिया ने आयोग को बताया कि झज्जर रोड (शक्ति भवन से गोकलगढ़ बाईपास तक) पर वर्ष 2012-13 में स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं लेकिन वे आज तक एक दिन भी नहीं जलीं।
वर्ष 2019 में लोक निर्माण विभाग (विद्युत शाखा) ने पुरानी हैलोजन लाइटों को हटाकर नई एलईडी लाइटें भी लगा दीं लेकिन स्थिति जस की तस रही। अधिकारियों के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर मचे घमासान के कारण जनता अंधेरे में रहने को मजबूर है।
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सुनवाई के दौरान नगर परिषद के अधिकारियों ने दावा किया कि यह क्षेत्र उनकी सीमा में नहीं आता। इस पर आयोग ने पूछा कि अगर यह क्षेत्र आपका नहीं था, तो 2017 में नगर परिषद ने बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन क्यों किया था? और 2019 में लोक निर्माण विभाग (विद्युत शाखा) से पुरानी लाइटें वापस क्यों मांगी थीं? इन सवालों पर नगर परिषद के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कहा कि उनका काम सिर्फ लाइट लगाना था, रखरखाव करना स्थानीय निकाय या पंचायत का काम है।
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आयोग ने जारी किए ये निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने आदेश जारी किए हैं। अतिरिक्त उपायुक्त रेवाड़ी को निर्देश दिया गया है कि वे 27 फरवरी तक रिपोर्ट सौंपें कि ये लाइटें नगर परिषद की सीमा में हैं या पंचायत के। यदि पंचायत के अधीन हैं, तो उनके रखरखाव की वित्तीय व्यवस्था कैसे होगी, इसका खाका तैयार करें। लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता (विद्युत) को स्पष्ट करना होगा कि किसके कहने पर ये लाइटें लगाई गईं। आयोग ने साफ किया कि बिना किसी वचन के लाइटें लगाकर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता।

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संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो होगी कार्रवाई
आयोग ने कहा कि डेढ़ दशक से लाइटों का बंद रहना सरकारी खजाने का दुरुपयोग है, जिसके लिए जवाबदेही तय की जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता विवेक भाटोटिया को भी रिपोर्ट की प्रति भेजकर क्षेत्राधिकार की पुष्टि करने को कहा गया है।
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