महेंद्रगढ़। 1962 के भारत-चीन युद्ध में रेजांगला बैटल के अमर शहीदों की अहीर धाम से लाई गई शहादत माटी की कलश यात्रा 19 प्रदेशों से होते हुए दो नवंबर को महेंद्रगढ़ जिले में प्रवेश करेगी। महेंद्रगढ़ के राव तुलाराम चौक पर इस यात्रा का भव्य स्वागत होगा।
शहर के राव तुलाराम चौक से परशुराम चौक तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। तीन नवंबर को यात्रा नारनौल में पहुंचेगी।
अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के राष्ट्रीय महासचिव व यात्रा के प्रदेश संयोजक रमेश राव पायलट, हरियाणा के मुख्य महासचिव बलवान फौजी, जिला अध्यक्ष रमेश बोहरा एडवोकेट, कार्यकारी जिला अध्यक्ष बहादुर सिंह थानेदार, जिला उपाध्यक्ष लालाराम नांगल सिरोही ने यात्रा को लेकर बुधवार को पत्रकारवार्ता आयोजित की।
उन्होंने बताया कि यह यात्रा हरियाणा में प्रवेश करने के उपरांत एक नवंबर को रेवाड़ी में एक विशाल कार्यक्रम के उपरांत एक विशाल कलश यात्रा जुलूस निकाला जाएगा। दो नवंबर को महेंद्रगढ़ में राव तुलाराम चौक स्थित पाल पैलेस पर शहीद नमन सभा के साथ महेंद्रगढ़ क्षेत्र की रेजांगला बैटल की 11 युद्ध वीरांगनाएं एवं उनके परिवारों को सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत एक रेजांगला (अहीर धाम) की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। कार्यक्रम के उपरांत कलश यात्रा का जुलूस अमर शहीद राव तुलाराम को नमन कर वहां से शुरू किया जाएगा और वह बालाजी चौक, सब्जी मंडी, परशुराम जी चौक, मसानी चौक, गौशाला रोड होते हुए रेजांगला चौक (माजरा चुंगी) तक जाएगा।
शहर में विभिन्न समाज एवं सामाजिक संगठन कलश यात्रा का स्वागत एवं नमन करेंगे। वहां से यात्रा मालड़ा गांव जाएगी वहां शहीद नमन सभा होगी। इसके उपरांत गांव झूक में रेजांगला के शहीदों को नमन करते हुए यात्रा का समापन होगा।
उन्होंने बताया कि तीन नवंबर को नारनौल में नसीबपुर के 1857 शहीद स्मारक से कलश यात्रा शुरू होगी और जिला न्यायालय, महावीर चौक, रेजांगला चौक (हीरो होंडा चौक) होते हुए ग्राम मांदी में एक विशाल शहीद नमन सभा के साथ समापन होगा वहां पर नारनौल क्षेत्र के पांच रेजांगला शहीदों की वीरांगनाएं एवं परिवारों को सम्मानित किया जाएगा।
-
रेजांगला बैटल के 124 वीर जवानों में 110 हो गए थे शहीद
महेंद्रगढ़ जिले के रेजांगला बैटल के 124 वीर जवानों में 110 शहीद हो गए थे और चार युद्ध बंदी बना लिए गए थे। 110 शहीदों में 60 हरियाणा के रहने वाले थे जिसमें रेवाड़ी जिले के 26, महेंद्रगढ़ जिले के 16 वीर जवान थे। रेजांगला बैटल विश्व सैनिक इतिहास में सबसे दुर्लभतम बैटल में अंकित है। रेजांगला शहीदों में महेंद्रगढ़ जिले से गांव मांडोला के प्रभातीलाल, पायगा के कालूराम व महादेवा, नांगल सिरोही के बारबर छाजुराम, खेड़की के रघुवीर सिंह बैरावास के रामजीलाल, झूक से शेर सिंह, मालड़ा से फूलचंद यादव, भोजावास से रामेश्वर, गाहड़ा से लक्ष्मी नारायण, स्याना से भूप सिंह, मांदी से पृथ्वी सिंह, कारियावास से नित्यानंद, बोचाड़िया से चंद्रशेखर, खत्रीपुर से श्रीराम, कांटी से ज्ञानचंद और इस युद्ध में जिंदा शहीद डोगरा दौंगड़ा अहीर के मानचंद और बेवल से गणेश सिंह यादव थे।