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और बरसा पानी तो खेतों में ज्यादा उगेगा सोना.

Fri, 26 Aug 2016 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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बारिश - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी जिले में पिछले दिनों खुलकर आए मानसून से इस बार पानी नहीं बरस रहा, बल्कि किसानों के लिए खुशहाली बरस रही है। 1.35 लाख एकड़ की जमीन के साथ 87 फीसदी से ज्यादा खेती के लिए उपयोगी जिले की जमीन पर खेती करने वाले हजारों किसान अब आसमां की ओर कुछ और हसरत से देख रहे हैं कि एक दो बरसात और हो जाए तो अगेती खेती के लिए भी सोना बरस जाए। फिलहाल जिले में अभी तक 504 एमएम बरसात हो चुकी है जो कि रेवाड़ी में अमूमन होने वाली 472.3 एमएम से ज्यादा है। सितंबर तक बारिश का सीजन जारी रहेगा। ऐसे में पिछले कई साल के रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है।

होगी बाजरा, ज्वार और ग्वार की खेती की बंपर पैदावार
मानसून के इस मौसम में जिले के खेतों में बाजरा, ज्वार और ग्वार की खेती की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है। कारण अच्छी मात्रा में पानी बरसना है। वहीं अक्टूबर या यूं कहें कि सितंबर में ही गेहूं, चना और सरसों की बिजाई से पहले अगर कुछ और पानी बरस गया तो इन फसलों के लिए सिंचाई की समस्या से किसानों को दो-चार नहीं होना पड़ेगा।
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2008 में हुई थी 737 एमएम बरसात
हाल के सालों की बात करें तो सबसे ज्यादा बरसात 2008 में हुई थी तब पांचों खंड मिलाकर कुल औसत बरसात 737 एमएम थी। जबकि इसके बाद सबसे ज्यादा इंद्रदेवता 2013 में मेहरबान हुए हैं। तब 587 एमएम औसत बरसात हुई थी। इस बार उम्मीद की जा रही है कि बरसात वर्ष 2008 का रिकॉर्ड भले ही न तोड़ पाए लेकिन 2013 के रिकॉर्ड को आराम से पार कर लेगी।

2010 से अब तक कैसी रही बरसात
साल         बरसात( औसत एमएम में)
2010            695
2011            493
2012            345
2013            587
2014            396
2015            339
2016(अब तक)     504
(सोर्स: रिवेन्यू एंड डीएम डिपार्टमेंट: 2015)

इस बार हुई बरसात खेतों में लगी फसलों के लिए बेहद लाभदायक है। कुछ और बरसात भी हो जाती है तो अगेती खेती के लिए भी फायदेमंद रहेगी।
-डॉ. कपूर सिंह, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
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