नागरिक अस्पताल के गायनी वार्ड में बिगड़ी हालत में बावल से रेफर की गई गर्भवती महिला को लगभग दो घंटे रखने के बाद आपरेशन थियेटर ले जाकर कह दिया गया कि एनेस्थेटिक डॉक्टर छुट्टी पर। महिला को रोहतक ले जाओ। बीपीएल परिवार की इस महिला की हालत सीरियस होने पर परिजन उसे एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर गए और वहां सीजेरियन से उसने एक बच्चे को जन्म दिया। परिजनों ने कहा कि यदि महिला को रोहतक ले जाते तो जच्चा-बच्चा दोनों की जान जा सकती थी। वहीं अस्पताल में एनेस्थेसिया को कोई डॉक्टर नहीं है।
दो दिन पहले गांव बिदावास निवासी दिनेश ने गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने के बाद बावल के सीएचसी में भर्ती करवाया लेकिन तबीयत बिगड़ने पर वहां के डॉक्टरों ने सीमा को रेवाड़ी नागरिक अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। दिनेश ने बताया कि वह अपनी पत्नी को 25 मार्च को सुबह 9 बजे नागरिक अस्पताल लेकर गया था। वहां लगभग साढ़े ग्यारह बजे डॉक्टर सीमा को आपरेशन थियेटर में ले गए। दिनेश ने बताया कि आधे घंटे बाद नर्स बाहर आई और बोली की एनेस्थेटिक डॉक्टर छुट्टी पर है, इसलिए सीमा को रोहतक ले जाओ। दिनेश ने बताया कि डॉक्टर खुद सीमा की तबीयत खराब होने की बात कह रहे थे, लेकिन 12 बजे उन्होंने सीमा को वहां से ले जाने के लिए कह दिया। दिनेश ने बताया कि पैसा होता तो पहले ही किसी निजी अस्पताल में डिलीवरी करा सकता था। यदि रोहतक ले जाते तो जच्चा-बच्चा की जान का खतरा था। अब उनके सामने निजी अस्पताल में पत्नी को भर्ती कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसके बाद कुछ लोगों की मदद से वह पत्नी को यहां के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां पर सीजेरियन डिलीवरी के बाद सीमा ने बच्चे को जन्म दिया।
सर्जन पूरे, लेकिन दो साल से नहीं है एनेस्थेटिक
सरकार की जननी सुरक्षा के नारे की पोल खोलने के लिए रेवाड़ी में दो साल से एनेस्थेटिक डॉक्टर नहीं है। नागरिक अस्पताल में गायनी सर्जन के साथ अन्य विभागों के सर्जन मौजूद हैं, लेकिन आपरेशन करने से पहले मरीज को बेेहोश करने के लिए एनेस्थेटिक डॉक्टर ही नहीं है। गौरतलब है कि सालों पहले नागरिक अस्पताल में महेश नारंग एनेस्थेटिक डॉक्टर थे, उन्होंने भी निजी कारणों से वीआरएस ले लिया था। इसके बाद कुछ दिनों के लिए डॉ. कर्मबीर आए थे, लेकिन वह भी यहां पर ज्यादा दिन नहीं रुके। उसके बाद से लेकर आज तक यहां पर एनेस्थेटिक डॉक्टर का प्रबंध नहीं हो पाया है।
आखिर क्यों नहीं रुकते नागरिक अस्पताल में एनेस्थेटिक
विशेषज्ञों के अनुसार नागरिक अस्पताल की बजाय यदि एनेस्थेटिक डॉक्टर स्वतंत्र रूप से निजी अस्पतालों के 4-5 केस निपटा दें तो उन्हें मोटा पैसा मिल जाता है। जानकारी के अनुसार एनेस्थेटिक डॉक्टर एक मरीज के लिए निजी अस्पतालों से 3-4 हजार रुपये वसूलते हैं। इसलिए सरकारी अस्पतालों में इन डॉक्टरों के लिए नौकरी करना घाटे का सौदा होता है।
गायनी वार्ड में पहले भी हो चुकी है एक गर्भवती की मौत
कुछ दिनों पहले उत्तम नगर में रहने वाली एक गर्भवती महिला को गायनी वार्ड में भर्ती कराया गया था लेकिन दो बार आपरेशन करने के कारण गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ गई थी। इसमें बच्चे को बचा लिया गया था, लेकिन गर्भवती को नहीं बचाया जा सका था। वहीं 25 मार्च को ही डॉक्टरों की लापरवाही के चलते बिशोहा निवासी एक गर्भवती की ओपीडी के बाहर फर्श पर ही डिलीवरी हो गई थी। डॉक्टरों ने इससे भी कुछ सबक नहीं लिया तथा उसी दिन सीमा को आपरेशन थियेटर ले जाकर रोहतक रेफर करने की बात कही।
छुट्टी के दिन डेपूटेशन पर लगाया डॉक्टर छुट्टी पर रहता है लेकिन अस्पताल की ओर से आपात स्थिति में डॉक्टर का प्रबंध किया जाता है। गर्भवती के साथ यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर मामला है। पूरे मामले की जांच की जाएगी। जिसकी भी इसमें लापरवाही पाई जाएगी,उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर की जाएगी।
डॉ.सुदर्शन पंवार, इंचार्ज, नागरिक अस्पताल