रेवाड़ी शहर के नागरिक अस्पताल में स्टॉफ और संसाधनों की कमी के कारण रोगियों को क्वालिटी उपचार नहीं मिल रहा है। आलम यह है कि दो वर्षों में ओपीडी रोगियों की संख्या दो गुणा बढ़कर 1200 तक पहुंच गई है लेकिन अस्पताल में प्रस्तावित पोस्ट से भी आधे पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर स्टॉफ काम कर भी रहा है, उनमें से भी कुछ लोग छुट्टी पर चले गए हैं। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि स्टॉफ के अभाव में रोगियों के उपचार में भी दिक्कतें आ रही हैं। रेवाड़ी में एक तरफ जहां मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को जल्द से जल्द शुरू करने की कवायद चल रही है, वहीं जो संसाधन उपलब्ध हैं उनका भी पूरी तरह उपयोग नहीं हो पा रहा है।
केवल 15 स्टॉफ नर्स ड्यूटी पर
नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों से ज्यादा रोगियों के स्वास्थ्य लाभ की जिम्मेदारी स्टॉफ नर्स पर होती है। अस्पताल में इसके लिए 37 पोस्ट प्रस्तावित हैं लेकिन यहां पर 17 पोस्ट पर ही नर्स काम कर रही हैं। 17 में से भी बीते सप्ताह दो नर्स डिलीवरी के कारण छुट्टी पर चली गई। अब ऐसे में पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी महज 15 नर्सों पर रह गई है।
पंद्रह दिन भी नहीं टिक पाए एनेस्थेटिक
प्रदेश के एसीएस (हेल्थ) पीके महापात्रा एवं डीजीएचएस डॉ. कमला सिंह के नागरिक अस्पताल के दौरे के दौरान अमर उजाला ने एनेस्थेटिक का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद एसीएस ने संज्ञान लेकर रोहतक से रेवाड़ी एक एनेस्थेटिक डॉक्टर को नियुक्त किया था। उक्त डॉक्टर भी अस्पताल में पंद्रह दिन से ज्यादा नहीं टिक पाया। बीमारी की बात कहकर वे भी छुट्टी पर चले गए। ऐसे में प्रसव के लिए भी नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों को उधार के डॉक्टर पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
सिटी स्कैन और एक्स-रे का बुरा हाल
नागरिक अस्पताल में एक्स-रे कराने के लिए एक सप्ताह तक के लिए मरीजों को समय दिया जाता है। पर्याप्त रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मरीज डॉक्टरों के साथ प्रतिदिन भिड़ते देखे जा सकते हैं। इधर ट्रॉमा सेंटर में लगी सिटी स्कैन मशीन भी डॉक्टरों के अभाव में धूल फांक रही है। एक्स-रे के डॉक्टर ही सिटी स्कैन इकट्ठे होने पर सप्ताह में दो दिन ट्रॉमा सेंटर में सिटी स्कैन करतेे हैं।
फर्ज से बड़ी है रिश्तेदारी
लिंगानुपात के मामले में रेवाड़ी हरियाणा में ही नहीं देश में शर्मसार हो चुका है। यहां के नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों और प्रशासन के प्रयासों के चलते स्थिति कुछ सुधर पाई थी। अस्पताल में तैनात चार गायकोनोलोजिस्ट डॉक्टरों में अब केवल एक ही रह गई हैं। दो डॉक्टर नौकरी छोड़कर चली गईं हैं। सूत्रों के अनुसार एक अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टर को सीएमओ ने रिश्तेदारी का फर्ज निभाकर छुट्टी पर भेज दिया। ऐसे में फर्ज की बजाय अस्पताल में रिश्तेदारी को तरजीह दी गई। गौरतलब है सीजेरियन डिलीवरी केवल गायकोनोलॉजिस्ट ही कर सकती है। वहीं अस्पताल में औसतन बीस फीसदी डिलीवरी सीजेरियन ही होती हैं।
स्टाफ नर्स के अभाव में अस्पताल में सबसे ज्यादा काम प्रभावित होता है। सीएमओ के साथ उच्च अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया जा चुका है। इसके साथ डॉक्टरों की कमी के लिए स्थानीय विधायक के साथ आला अधिकारियों को लिखा गया है।
डॉ. सुदर्शन पंवार, एसएमओ, नागरिक अस्पताल