पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ झंडा उठाए चल रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का मानना है कि वह खुद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ही सीएम पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं। पूर्व सीएम हुड्डा से खासे नाराज कैप्टन अजय सिंह यादव कहते हैं कि हुड्डा ने अपने कार्यकाल में सत्ता का केंद्रीयकरण तो किया ही साथ ही तीन जिलों को छोड़ बाकी के साथ भेदभाव भी किया। उन्होंने जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के लिए जहां भाजपा सरकार के सिंचाई मंत्री और वित्त मंत्री को कठघरे में खड़ा किया वहीं अधिकारियों पर भी भाईचारा निभाने का आरोप जड़ा।
पूर्व मंत्री अजय सिंह यादव ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि चौधरी भजन लाल के वक्त सत्ता का केंद्रीयकरण हुआ। तब हुड्डा कहते थे, चार रोटी हो तो सभी में बंटनी चाहिए। उनकी इस सोच पर मैंने, चौधरी सुरेंद्र सिंह, कुमारी शैलजा और राव इंद्रजीत सिंह ने 2005 में उनका नाम आगे किया लेकिन जब वह सीएम बन गए तो उन्होंने भी सत्ता का केंद्रीयकरण किया। मैंने तीन मंत्रियों की कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन सुनवाई नहीं की। सिंचाई मंत्री रहते मैंने जब सिरसा में बयान दिया कि गुजराज की कृषि विकास दर नौ फीसदी है और हमारी दो फीसदी है। इसलिए एक टीम वहां भेजेंगे तो हुड्डा ने हाईकमान तक यह बात पहुंचा दी कि मैं नरेंद्र मोदी का प्रशंसक हूं। कई विधायकों से बयान दिलवा दिए। मेरे से फाइनेंस और इरिगेशन डिपार्टमेंट ले लिए और बिजली डिपार्टमेंट दिया। बातचीत की तो कहा, तीन महीने बाद दोबारा दे देंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया।
यह पूछने पर कि कांग्रेस में अगला सीएम बनने के लायक कौन है? अजय यादव ने कहा कि मैं भी खुद को सक्षम समझता हूं। 15 विभागों का मंत्री रह चुका हूं। छह बार विधायक रहा हूं। पूरा अनुभव है। मेरे अलावा कुमारी शैलजा हैं। अच्छा अनुभव है। पार्टी प्रोजेक्ट कर सकती है। अगली सरकार कांग्रेस की ही बनेगी, यह भी तय है।
वोटर कांग्रेस के साथ
कांग्रेस में नजर आ रहे बिखराव, खेमेबंदी के चलते क्या अगली बार कांग्रेस की सरकार बनेगी, इस सवाल पर कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि 1991 में भी कांग्रेस बीरेंद्र सिंह और भजन लाल के खेमे में बंटी थी। 2000 और 2005 में हुड्डा और भजन लाल के खेमे थे लेकिन सरकार तो तब भी बनी। वोटर कांग्रेस के साथ है और भाजपा सरकार से दुखी है। प्रदेश में कांग्रेस का प्रभाव है। हुड्डा का भी अपना प्रभाव है।
36 बिरादरी को साथ लेकर चल रहा हूं
आरक्षण को लेकर की जा रही बयानबाजी के मद्देनजर यह पूछने पर कि क्या आप प्रदेश में खुद को नॉन जाट के नेता के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं? उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है। मैं 36 बिरादारी को साथ लेकर चल रहा हूं। जाट भी मेरे हलके में हैं। कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। जाटों को आरक्षण देने में आपत्ति नहीं है, सिर्फ ये कहना है कि 27 फीसदी कोटे से छेड़छाड़ न की जाए।
अफसर, दो मंत्री उपद्रव के जिम्मेदार
कैप्टन ने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं। हिंसा भड़केगी तो मजिस्ट्रेट ही रोकेगा। अधिकारियों ने भाईचारा निभाया है। इसके अलावा भाजपा सरकार में मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और कैप्टन अभिमन्यु अब जाटों के सामने बयान दे रहे हैं कि उन्होंने उनके लाठी तक नहीं लगने दी। ऐसे में साफ है कि इन लोगों को ट्रैक पर बैठाने वाले यही थे। रही बात विरेंद्र सिंह की तो उसके लिए कोर्ट भी कह चुकी है कि उन पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं बनता। प्रोफेसर के बहाने सरकार सब कुछ हमारे पर थोपना चाहती है।
रेवाड़ी से बेटे चिरंजीव को उतारेंगे मैदान में
पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव ने कहा कि वह इस बार लोक सभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी विस सीट पर चुनाव कौन लड़ेगा, यह पूछने पर उन्होंने कहा कि रेवाड़ी से चुनाव मेरा बेटी चिरंजीव राव लड़ेगा। वह तैयारी कर रहा है। यदि मेरा सीएम बनने का हुआ तो मैं बाद में कहीं से भी चुनाव लड़ लूंगा।
उपद्रव में कांग्रेस की साजिश के पुख्ता सबूत : धनखड़
यह सभी को पता है कि उपद्रव किसने कराया। इसमें पूरी तरह से कांग्रेस का हाथ रहा। पुलिस को इसके पुख्ता सबूत भी मिल रहे हैं। जैसे-जैसे कांग्रेसियों के नाम सामने आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे कांग्रेसी दूसरों पर मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं।
ओमप्रकाश धनखड़, कृषि मंत्री, हरियाणा सरकार।