दृढ़ निश्चय के साथ शुरू की थी परीक्षा की तैयारी
जीवन में सफल होने के लिए हर व्यक्ति को दृढ़ निश्चयी होना आवश्यक है। परीक्षा मेरे लिए एक चुनौती थी, जिसके लिए माता-पिता और शिक्षकों ने यथासंभव भरपूर मदद की। मैंने कोरोनाकाल में 8-10 घंटे तक घर में रहकर पढ़ाई की। शिक्षकों से मेरा लगातार जुड़ाव रहा। छात्रों को जीवन में कुछ पाना है तो उन्हें कड़ी मेहनत व लगन के साथ पढ़ाई करनी चाहिए। तभी सफलता उनके पैर चुमेगी।
-लक्की यादव, सनराइज स्कूल
खास तैयारी से मिली सफलता
स्कूल समय के बाद घर पर परीक्षा की तैयारी की और यह निश्चय किया था कि परीक्षा में अव्वल स्थान प्राप्त करना है। छात्र अपनी जिंदगी संवारना चाहते हैं तो मन लगाकर पढ़ाई करें। दूसरों से आगे निकलने की हिम्मत रखें। सफलता में शिक्षकों और अभिभावकों का सहयोग रहा। अगर वे नहीं होते तो संभवत: मुझे यह उपलब्धि हासिल नहीं होती।
- महक यादव, छात्रा, एसकेजी भाकली
एनसीईआरटी की किताबें बनी मित्र
कोरोना काल में मेरे घर में फोन नहीं था, इस वजह से ऑनलाइन कक्षाएं नहीं ले पाई, मगर अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। स्कूल ने ऑनलाइन कक्षाएं लगाई गई, मगर एनसीईआरटी की किताबें मित्र बनी। भूगोल के सवाल थे, जो एनसीईआरटी में थे और हेल्प बुक में नहीं थे। कोरोना काल में मैंने 9 से 12 घंटे तक पढ़ाई की। बीच में पकवान बनाना भी सीखा।
- नेहा, जीवन ज्योति सीनियर सेकेंडरी स्कूल
अपनी मेहनत पर विश्वास रखें, कामयाबी जरूर मिलेगी
मैनें तीन से चार बार अपना कोर्स दोहराया। कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं में इंटरनेट की समस्याएं ज्यादा थी। शिक्षकों की वजह से यह उपलब्धि मिली। अपनी मेहनत पर विश्वास रखें, कामयाबी जरूर मिलेगी। मैं अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को देना चाहूंगी।
- तान्या, एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल
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ऑनलाइन पढ़ाई से छात्रों को कम फायदा हुआ
एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ी और परीक्षा में कामयाबी मिली। ऑनलाइन कक्षाएं कम समझ में आई। इसका छात्रों को कम फायदा हुआ। प्रत्येक माता-पिता को अपने बच्चे से उम्मीदें होती हैं। मेरी यह उपलब्धि मेरे शिक्षकों एवं माता -पिता की मुझ पर की गई मेहनत का परिणाम है। कोरोना काल में अखबार और पत्रिकाएं पढ़ी। खुद 8 से 10 घंटे पढ़ाई की। फोन पर अपनी कक्षा के बच्चों से पढ़ाई को लेकर चर्चा की। खुद मेहनत की, इसलिए यह मुकाम मिला।
- कुमकुम, एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल
मेहनत के अनुरूप परिणाम मिले तो अच्छा लगता
मेहनत के अनुरूप परिणाम मिलता है तो अच्छा लगता है। घर के कामों की वजह से लगातार पढ़ाई में समस्याएं आती थीं। मैं अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को देना चाहती हूं, जिन्होंने मेरा सहयोग किया। मेरे किसी भी विषय में 100 में से 100 नंबर नहीं आए, बस इसी बात का दुख है। सभी विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की किताबों पर फोकस करना चाहिए।
- श्वेता शर्मा, एसकेजी स्कूल, भाकली
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अपनी मेहनत पर विश्वास करें विद्यार्थी
मैंने जितनी मेहनत की, उतने ही नंबर आए हैं। पढ़ने के बाद भी घर का काम करना होता था। मेरे पिता आर्मी में हैं। मैंने एनसीईआरटी, गाइड व अन्य किताबों पर फोकस किया। इंटरनेट का भी सहारा लिया। सबसे बड़ी बात है कि मैंने अपनी मेहनत पर विश्वास किया। मैं अपना श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को देना चाहती हूं। सभी विद्यार्थियों को मेरा संदेश यही है कि अंधविश्वास और किस्मत पर विश्वास न करके मेहनत पर विश्वास करना चाहिए।
- दीपांशु यादव, एसकेजी स्कूल, भाकली
टॉप करके अच्छा लगा
मेहनत के अनुसार नंबर आए। टॉप करके अच्छा लग रहा है। मेरे पिताजी राजमिस्त्री है। ऑनलाइन पढ़ाई करते समय कोई भी परेशानी नहीं आई। 20-25 मॉडल टेस्ट पेपर हल किए। एनसीईआरटी की किताबों के साथ-साथ अपनी मेहनत पर भरोसा था। बार-बार रिविजन किया। इसके साथ-साथ आर्थिक चुनौतियों का भी सामना किया।
- अन्नू, एसकेजी स्कूल, भाकली
पढ़ाई के साथ घर का काम करती थी
पढ़ाई के साथ-साथ घर के कामों में हाथ बंटाती थी। नियमित पढ़ाई के साथ एनसीईआरटी की किताबों पर फोकस किया। शिक्षकों की ओर से बताई गई बातों से काफी सहारा मिला। मैं नए विद्यार्थियों को संदेश देना चाहती हूं कि हरियाणा बोर्ड के कुछ प्रश्नों की पुनरावृत्ति होती है। इसलिए गत वर्षों के प्रश्नपत्रों को भी पढ़ लें।
- सपना, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कापड़ीवास
ऑफलाइन कक्षाएं अच्छी लगी
मैं प्रतिदिन सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करता था। ऑनलाइन कक्षाएं छोड़कर ऑफलाइन कक्षाएं अच्छी लगी। मैं सभी विद्यार्थियों को संदेश देना चाहता हूं कि मेहनत पर विश्वास करें और एनसीईआरटी की किताबों के साथ गाइड का भी सहारा लें। मैं अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता व गुरुजनों को देना चाहता हूं।
- महेश कुमार, एसकेजी स्कूल, भाकली
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मेहनत के बल पर मिली कामयाबी
मैं अपनी कामयाबी का श्रेय अपने शिक्षकों एवं अभिभावकों को देता हूं। कोरोना काल में अच्छी मेहनत की। अतिरिक्त कक्षाएं लीं और छह घंटे तक लगातार पढ़ाई की। मैं आईआईटी में जाना चाहता हूं और इसके लिए कोचिंग ले रहा हूं। मेहनत के बल पर कामयाबी मिली। सभी के सहयोग की वजह से इस परीक्षा में सफलता मिली।
- कार्तिक शर्मा, श्रीकृष्ण स्कूल हांसाका
आईएएस बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती हूं
कोरोना काल में 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई की। पौधरोपण में रुचि है। अपने दादा को सुबह - शाम धार्मिक पुस्तकें पढ़कर सुनाती हूं। मैं आईएएस बनना चाहती हूं। साथ ही देश और समाज की सेवा करना चाहती हूं। छात्रों को परीक्षा में सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए। तभी वे सफल हो पाएंगे।
-अंजलि, छात्रा, संत कबीर स्कूल, धारूहेड़ा
इंजीनियर बनकर देश सेवा करना चाहता हूं
कोरोना काल में मैंने 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई की और अब सप्ताह में पांच दिन नियमित स्कूल जाता हूं, जबकि दो दिन कोचिंग के लिए जाते हैं। स्कूल से 3 बजे अवकाश मिलने के बाद घर आकर खाना खाकर पढ़ाई में जुट जाते हैं। करीब 11 बजे तक यह सिलसिला चलता है। मैं इंजीनियर बनना चाहता हूं। साथ ही देश की सेवा करना चाहता हूं। सफलता के लिए कठिन परिश्रम जरूरी है। अपनी सफलता का श्रेय अपने अभिभाव और गुरुजनों को देता हूं।
- दीपक, एसडीएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बोलनी
जीवन में बदलाव लाने में शिक्षा की अहम भूमिका
यह परीक्षा मेरे जीवन में नई सोच लेकर आई। जीवन में बदलाव लाने में शिक्षा की अहम भूमिका है। कोरोना काल में हमें ऑनलाइन पढ़ाई करने में कुछ परेशानी जरूर आई। दस घंटे तक नियमित पढ़ाई की। सभी का अच्छा सहयोग मिला।
- हिमश्वेता, एसकेजी भाकली।
प्रकृति ने दी प्रेरणा
कोरोना काल में मेरी पढ़ाई को नई दिशा दी। अपनी पढ़ाई को लेकर मैं संजीदा हुई। माता - पिता का पूरा सहयोग मिला। शिक्षकों की मेहनत के बिना यह मंजिल नहीं मिल सकती थी। सभी का आभार।
- हिमांशी, रावमावि. बोडिया कमालपुर।
घर पर पढ़ाई की वजह से कामयाब हुई
मैं नियमित रूप से पढ़ाई करने में विश्वास रखती हूं। विद्यालय जाना हो या फिर घर पर पढ़ाई करना, कई घंटे बैठना पहले बहुत बोर करता था, मगर इस परीक्षा ने मेरी मेहनत को नई दिशा दी। सम्मान मिला तो बहुत अच्छा लगता है। अमर उजाला को धन्यवाद।
- निधि यादव, एसकेजी स्कूल भाकली।
मेरी मां ने दिलाई कामयाबी
मेरी यह सफलता सबकी मेहनत का संयुक्त प्रयास है। मेरी मां ने कोरोना काल और अन्य दिनों में हमारे लिए जो किया, उसे मैं कभी भुला नहीं पाऊंगी। लगातार मेहनत करते रहेंगे तो मंजिल जरूर मिलेगी, इस परीक्षा ने यह सबक दिया।
- रिंकी, ज्ञानदीप विद्या मंदिर दुल्हेड़ा खुर्द।
मेहनत रंग लाई
स्कूल से लेकर घर में पढ़ाई पर जो मेहनत की, वह रंग लाई। यह सफलता अकेले मेरी मेहनत से नहीं, बल्कि मेरे गुरुजन, माता - पिता और पूरे परिवार के सहयोग और मेहनत का परिणाम है।
- कुमकुम, एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल करावरा - मानकपुर।
शिक्षकों के मार्गदर्शन से मिली कामयाबी
मेरे विद्यालय में हमें जो शिक्षा मिली, उसने हमें यह कामयाबी दिलाई। शिक्षकों के मार्गदर्शन और मेहनत की वजह से सफलता की सीढ़ी चढ़ने में मदद मिली। सभी का आभार। अमर उजाला का विशेष आभार।
- मुस्कान, ज्ञानदीप विद्या मंदिर दुल्हेड़ा खुर्द।
यह मेरी नहीं, ज्ञान की जीत
यह परीक्षा मेरे लिए बड़ी महत्वपूर्ण थी। शिक्षक बार - बार मेहनत करने के लिए कहते थे मगर इस सफलता ने उनकी कही बातों को प्रमाणित कर दिया। अब अधिक मेहनत करूंगा। विद्यालय परिवार से लेकर घर के सभी सदस्य इस कामयाबी के हकदार हैं।
- वीरेंजीत, राजकीय आदर्श संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल ततारपुर इस्तमुरार।
सफलता का स्वाद बेहद मीठा
मैंने पढ़ा था कि मेहनत का फल मीठा होता है, मगर अब पता चला कि सफलता उससे भी मीठी होती है। शिक्षकों, परिवार और मेरे सहपाठियों की मेहनत व सहयोग से यह उपलब्धि मिली। अमर उजाला और सभी का धन्यवाद।
- सपना कुमारी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बोड़िया कमालपुर।