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विकास पर भारी फैक्ट्रियों का जहरीला पानी

Wed, 11 Jan 2017 12:11 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला
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खेतों में भरा पानी।
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जिला के बावल औद्योगिक क्षेत्र की कई इकाइयों से निकलने वाला जहरीला पानी आसपास बसे गांवों के ग्रामीणों के लिए आफत बना हुआ है। आसलवास, पातुहेड़ा, बनीपुर, जलियावास, करनावास, ड्योढ़ई आदि गांवों की करीब 40 एकड़ जमीन, इस केमिकल युक्त पानी से खराब हो रही है। इससे एक ओर जलस्तर ऊपर हो रहा है। लेकिन यह पानी जहरीला होने के कारण पैैैदावार पर भी असर डाल रहा है।
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बावल औद्योगिक क्षेत्र में करीब 350 फैक्ट्रियां हैं। नियमानुसार फैक्ट्रियों का गंदा पानी फैक्ट्री से बाहर नहीं जाना चाहिए। लेकिन कई फैक्ट्री संचालक नियमों को ताक पर रखकर यह पानी बाहर छोड़ रहे हैं। इससे आसपास के क्षेत्र में नुकसान हो रहा है।
आसलवास के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले करीब पांच साल में उनके गांव के कई लोगों के मवेशी फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले पानी को पीने से मर चुके हैं। कई बार मांग करने के बाद भी सरकार ने इन्हें कोई मुआवजा तक नहीं दिया।
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जमीन भी गई रोजगार भी छिन गया
आसलवास, पातुहेड़ा, बनीपुर, ड्योढ़ई आदि गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्रियों के लिए उनकी उपजाऊ भूमि अलॉट करने से पूर्व उनके बच्चों को रोजगार दिए जाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन न तो उनके बच्चों को रोजगार दिया गया और ना ही उन्हें रहने के लिए कोई सुविधा दी गई। वहीं एचएसआईआईडीसी की ओर से भी भूस्वामी को एक रिहायशी प्लॉट देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अभी तक करीब 75 प्रतिशत लोगों को ही रिहायशी प्लॉट दिए गए है। शेष लोग निगम के कार्यालय में चक्कर लगा रहे हैं।

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का अभाव
करीब तीन दशक पूर्व स्थापित बावल औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की मांग समय समय पर उठती रही है। बावजूद इसके अभी तक क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाया गया है। शुरुआती दौर में इस क्षेत्र की फैक्ट्रियों से निकलने वाला पानी बहुत कम था। जैसे-जैसे उद्योगों का विस्तार हुआ क्षेत्र में फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी की मात्रा भी बढ़ने लगी।

क्या कहते हैं कंपनी प्रबंधक
फैक्ट्रियों से निकलने वाला पानी केमिकल युक्त होता है। होना तो यह चाहिए कि छोटा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर दूषित पानी को  कृषि योग्य बनाना चाहिए। या फिर बोर करवा कर जमीन में डालना चाहिए। एचएसआईआईडीसी की ओर से भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। जल्द ही जहरीले पानी से निजात मिल जाएगी। एनटीएन कंपनी का एक बूंद भी पानी बाहर नहीं छोड़ा जा रहा है।
- रामपाल यादव, वरिष्ठ प्रबंधक, एनटीएन कंपनी बावल।


 क्या कहते हैं ग्रामीण
फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी से ग्रामीणों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी व प्रदूषण से लोगों का जीना दूभर हो रहा है। लेकिन जमीन देने के बाद भी रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है। - मोनू, ग्रामीण

फैक्ट्रियों के इस दूषित पानी से ग्रामीण एवं मवेशी दोनों को नुकसान हो रहा है। भूमि का सारा पानी नमकीन हो गया है। ट्यूबवेल में भी नमकीन पानी आने लगा है। मजबूरी में ग्रामीणों को महंगे भाव में पीने का पानी खरीदना पड़ रहा है। - अर्जुन सिंह, ग्रामीण, आसलवास।

फैक्ट्रियों के केमिकल युक्त पानी से जीना दुश्वार हो गया है। न तो खेती कर सकते हैं और ना ही पशु पाल सकते हैं। भूमिगत जलस्तर तो ऊपर गया, लेकिन ट्यूबवेलों का पानी बदल गया। यह पानी अब पीने लायक ही नहीं है। - सूरजभान, ग्रामीण

केमिकल युक्त पानी से आसपास के गांवों में जमीन का पानी नमकीन हो गया है। पशुधन की भी हानी हो रही है। वातावरण भी दूषित हो रहा है। इसका शीघ्र ही समाधान होना चाहिए। अन्य बड़ा नुकसान हो सकता है। - सोनू, पीड़ित ग्रामीण।


फैक्ट्रियों के दूषित पानी से गांव के ट्यूबवेलों का पानी भी खराब हो गया है। परिणामस्वरूप महंगे भाव में पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। इससे स्वास्थ्य तो खराब हो रहा है। आर्थिक हानि भी हो रही है। - इंद्रजीत,छात्र।

बुजुर्गों ने सरकार को उद्योग लगाने के लिए जमीन दी ताकि बच्चों को रोजगार मिल सके, लेकिन आज न रोजगार है न ही खेती करने के लिए जमीन। इसके उलट फैक्ट्रियों के गंदे पानी  से जीना दुश्वार हो रहा है। - भूपेंद्र, ग्रामीण

फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी के निस्तारण के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि अभी मेरे पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी शीघ्र ही इस समस्या का निस्तारण कर दिया जाएगा।
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- वीर सिंह कालीरमन, एसडीएम, बावल

बावल में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीसी)  का काम चल रहा है। शीघ्र ही गंदे पानी की समस्या से निजात मिल जाएगी। इसमें सारा पानी फिल्टर हो जाएगा।
- एसएस लांबा, सीनियर मैनेजर, इस्टेट, एचएसआईआईसी
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