सेमिनार में भाग लेते विद्यार्थी। स्रोत : विवि
रेवाड़ी। इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से भारतीय पारंपरिक संचार विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज करण सिंह ने कहा कि संवाद से ही विवादों का समाधान संभव है।
उन्होंने कहा कि संचार के बिना मानव जीवन अधूरा है। निरंतर और परस्पर संवाद के माध्यम से ही आपसी विवादों का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कथा-किस्सों, राग-रागिनी, सांग, चौपाल, कठपुतली और नुक्कड़ नाटक जैसे पारंपरिक माध्यमों के साथ आधुनिक तकनीकी युग में संचार के बदलते स्वरूप पर चर्चा की।
उन्होंने विद्यार्थियों को सही सूचनाओं का उपयोग कर ज्ञानवर्धन करने और लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित किया। विभागाध्यक्ष प्रो. निखिलेश यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।
अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. रोमिका बत्रा सुखीजा ने दैनिक जीवन में संचार के महत्व पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. मुकुट अग्रवाल ने किया। इस दौरान डॉ. विनित, डॉ. विनय, भाविका, शुभम सहित स्टाफ सदस्य और विद्यार्थी मौजूद रहे।