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देखरेख के अभाव में 12 वर्ष में ही खंडहर हो गया राजीव गांधी खेल स्टेडियम

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कोसली। हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे लाने के लिए सरकार ढिंढोरे पीट रही है, वहीं उपमंडल के गांव नेहरूगढ़ के लोगों द्वारा बेशकीमती जमीन मुफ्त में देने के बाद भी यहां महिलाओं को खेलों का प्रशिक्षण देने के लिए किसी भी खेल के लिए ना तो महिला कोच है और ना ही पुरुष वर्ग के लिए कोई कोच की सुविधा है। स्टेडियम गांव की प्रतिभाओं को उभारने के लिए बनाया गया था।
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क्षेत्र के गांव नेहरूगढ़ में तैयार स्टेडियम कुछ साल में खंडहर में तब्दील हो गया। यह स्टेडियम ग्रामीण आंचल की खेल प्रतिभाओं को उभारने को लेकर तैयार किया गया था। प्रधानमंत्री राजीव गांधी की याद में पिछली सरकार ने पूरे हरियाणा में राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर बनाए थे। इसके तहत उपमंडल के गांव नेहरूगढ़ में भी खेल परिसर तैयार किया गया था। जिस पर तीन करोड़ रुपये खर्च हुए थे। पांच एकड़ में तैयार स्टेडियम का शुभारंभ वर्ष 2010 में तत्कालीन सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने किया था। देखरेख के अभाव में स्टेडियम खस्ताहाल हो चुका है। समय के बदलाव के साथ अब कुश्ती, कबड्डी दौड़, खो-खो, फुटबाल वालीबाल, गोला फेंक, जैवलियन आदि खेलों का आयोजन भी किसी प्रतियोगिता के कुछ समय पूर्व ही अभ्यास में नजर आता है। उपमंडल के गांव नेहरूगढ़ में पांच एकड़ में बना राजीव गांधी खेल स्टेडियम केवल नाममात्र का है। यहां सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। स्टेडियम में दौड़ के लिए ट्रैक नहीं बनाए गए। मैदान में झाड़ियां उगी हुई हैं। मैदान एक प्रकार से खेल स्टेडियम आवारा पशुओं का विचरण स्थल बन कर रह गया है। वहीं स्टेडियम लोगों के लिए शराब पीने का सुरक्षित स्थान अधिक बना हुआ है । स्टेडियम भवन में निर्माण के समय लगाएं पंखे और फिटिंग तक को लोग उखाड़ ले गए हैं। जिस जगह स्टेडियम में खेल की पिच बननी थी वह घोषणा के 12 साल बाद भी नहीं बन पाई है।
नहीं है पीने के पानी की व्यवस्था
खेल स्टेडियम में खिलाड़ियों के पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है। स्टेडियम की सभी लाइटें लोग उखाड़ ले गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेडियम में उपलब्ध खेल सुविधाओं और इसकी दशा को देखकर यह नहीं लगता कि यह भी कोई स्टेडियम हो सकता है।
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नेहरूगढ़ के खेल स्टेडियम की दुर्दशा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अब पता चला है। इसके लिए बजट की सरकार से मांग कि जाएगी।- अनिल यादव, बीडीपीओ, नाहड़ खंड
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