रेवाड़ी। देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों पर अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ रेवाड़ी ने आवाज बुलंद की है।
महासंघ की ओर से जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) एचपी बंसल रेवाड़ी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया जिसमें इस अनिवार्यता को शिक्षकों के हितों के विरुद्ध बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई। महासंघ पदाधिकारियों का कहना है कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी जैसी परीक्षा थोपना अन्यायपूर्ण है।
कहा कि इससे शिक्षकों में मानसिक दबाव बढ़ रहा है और शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों को इस अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। इसके साथ ही महासंघ की ओर से हरियाणा के राज्यपाल को भी एक अलग ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन के माध्यम से भिवानी और कोरियावास में नवस्थापित मेडिकल कॉलेजों में नई भर्ती प्रक्रिया के तहत मेडिकल ऑफिसर व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की मांग की गई।
पदाधिकारियों ने कहा कि स्टाफ की कमी के कारण इन मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। इस मौके पर देवेंद्र कुमार, प्रदेश अध्यक्ष मक्कम हरियाणा, अजय कुमार, जिला प्रभारी मक्कम रेवाड़ी, मूल बाबूलाल कबीरपंथी, प्रदेश अध्यक्ष मूलनिवासी संघ हरियाणा, दिनेश कुमार, जिलाध्यक्ष मूलनिवासी संघ रेवाड़ी, रामकिशन, भगवान सिंह, कर्मवीर सिंह, राजरत्न व भगवान दास सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांगों को शीघ्र पूरा करने की अपील की।